तेहरान । ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा की गई बर्बरता की रिपोर्टें सामने आई हैं। एक रिपोर्ट में पत्रकार ने आरोप लगाया है कि ईरानी शासन (Iranian regime) ने विरोध प्रदर्शनों को कुचलने के लिए महिलाओं के खिलाफ बलात्कार, अंग-भंग और शारीरिक यातनाओं का इस्तेमाल किया।
हिरासत में महिलाओं के साथ अमानवीय व्यवहार
प्रकाशित रिपोर्ट में प्रत्यक्षदर्शी बयानों के अनुसार, महिलाओं को हिरासत (Arrested) में बलात्कार की धमकियां दी गईं, उन्हें निर्वस्त्र किया गया और कुछ को इंजेक्शन दिए गए।
डर फैलाने के लिए सार्वजनिक यातनाएं
प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि इन अत्याचारों का लक्ष्य केवल विरोध को दबाना ही नहीं, बल्कि भय पैदा करना और महिलाओं को सार्वजनिक रूप से दंडित करना था। विरोध के कई तरीकों में हिजाब पहनने से इंकार करना, बाइक चलाना और खामेनेई की तस्वीर जलाना शामिल थे।
अंग-भंग और शारीरिक हिंसा के गंभीर आरोप
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि प्रदर्शनकारी महिलाओं के गर्भाशय निकाले गए, सिर की खाल नोची गई और शरीर पर सिगरेट के निशान बनाए गए। कुछ मामलों में बच्चों तक को हिंसा का शिकार बनाया गया।
युवतियों को डराने के लिए सामूहिक धमकियां
एक महिला प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि सुरक्षा बल (Sequrity Force) घायल और बिना घायल युवतियों को एक-दूसरे के ऊपर फेंकते और उन्हें बलात्कार की धमकी देते थे।
सबूत मिटाने के आरोप
रिपोर्ट में बताया गया है कि ईरान सरकार अत्याचार के सबूत मिटाने की कोशिश कर रही है, जैसे शवों को परिजनों को न सौंपकर जला देना।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया और मानवाधिकार संगठनों की पुष्टि
ब्रिटिश अखबार ने केर्मानशाह शहर में हिरासत में 16 वर्षीय लड़की सहित कई महिलाओं के साथ यौन हिंसा की घटनाओं की रिपोर्ट की। कुर्दिस्तान ह्यूमन राइट्स ने बताया कि सुरक्षा बल महिलाओं को डंडों से पीटते और उनके संवेदनशील हिस्सों को गलत तरीके से छूते थे। जनवरी में प्रदर्शनों के दौरान इंटरनेट और संचार सेवाओं को बंद कर दिया गया और आईआरजीसी की बसीज मिलिशिया के साथ-साथ इराक से आए हजारों शिया लड़ाके तैनात किए गए।
खामेनेई ने बताया विदेशी साजिश
अयातुल्ला अली खामेनेई ने इन प्रदर्शनों को ईरान में इस्लामी शासन के तख्ता पलट की विदेशी साजिश करार दिया।
मृतकों की संख्या पर अलग-अलग दावे
ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों की कार्रवाई में मारे गए लोगों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार 3,117 लोग मारे गए, जबकि एक रिपोर्ट में यह संख्या कम से कम 5,000 आंकी गई है।
अन्य पढ़े: Delhi- संसद गेट पर निलंबित सांसदों का प्रदर्शन, पोस्टरों से पीएम पर समझौते का आरोप
दमन के बावजूद नहीं झुके लोग
मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि हजारों मामलों की अब भी जांच चल रही है। ईरान के लोग खामेनेई शासन की बर्बर कार्रवाई के बावजूद हार मानने को तैयार नहीं हैं। लोगों का कहना है कि पूरा देश शोक में डूबा है, लेकिन विरोध की आवाज़ अब भी ज़िंदा है।
Read More :