Iran israel war pakistan: पश्चिम एशिया में बढ़ते ईरान और इज़राइल संघर्ष ने पूरी दुनिया का ध्यान आकर्षित किया है। अब इस विवाद में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।
ईरान के सर्वोच्च नेता अली ख़ामेनेई की मृत्यु और ईरान के तेल केंद्रों पर अमेरिका तथा इज़राइल के हमलों के बाद इस्लामाबाद में चिंता का माहौल बताया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ परिस्थितियों में पाकिस्तान इस संघर्ष में शामिल हो सकता है।
पाकिस्तान के शामिल होने के पाँच कारण
१. सऊदी अरब के साथ रक्षा समझौता
पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच एक महत्वपूर्ण रक्षा समझौता है। यदि सऊदी अरब पर हमला होता है तो उसे पाकिस्तान पर हमला माना जा सकता है।
२. देश के भीतर धार्मिक दबाव
पाकिस्तान में बड़ी संख्या में शिया (Iran israel war pakistan) मुसलमान रहते हैं। अली ख़ामेनेई की मृत्यु के बाद कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हुए और ईरान के समर्थन की मांग उठी।
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३. सुरक्षा संबंधी आशंकाएँ
पाकिस्तान के कुछ नेताओं का कहना है कि ईरान के बाद इज़राइल का अगला लक्ष्य पाकिस्तान हो सकता है।
४. अफगानिस्तान के साथ तनाव
अफगानिस्तान सीमा पर पहले से ही तनाव की स्थिति बनी हुई है। ईरान की अस्थिरता का असर पाकिस्तान के बलूचिस्तान क्षेत्र पर पड़ सकता है।
५. परमाणु शक्ति का पहलू
पाकिस्तान एक परमाणु शक्ति संपन्न देश है। इसलिए इस संघर्ष में उसकी संभावित भूमिका को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंता व्यक्त की जा रही है।
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