इस्लामाबाद। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अब कूटनीतिक प्रयास तेज हो गए हैं। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच संभावित टकराव को टालने के लिए पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद (Capital Islamabad) में बड़ी बैठक आयोजित की गई है, जिसमें कई अहम देशों के विदेश मंत्री शामिल हुए हैं।
तीन देशों के विदेश मंत्री एक मंच पर
इस अहम बैठक में सऊदी अरब, तुर्किये और मिस्र के विदेश मंत्री (Foriegn Minister) हिस्सा ले रहे हैं। बैठक की मेजबानी पाकिस्तान कर रहा है, जिसे क्षेत्रीय कूटनीति का बड़ा कदम माना जा रहा है।
द्विपक्षीय वार्ताओं का दौर भी जारी
इशाक डार ने मिस्र के विदेश मंत्री बद्र अब्देलत्ती से मुलाकात की। इसके अलावा वे तुर्किये के हाकान फिदान और सऊदी अरब के फैसल बिन फरहान के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय वार्ताएं कर रहे हैं।
इन नेताओं की मुलाकात शहबाज शरीफ से भी प्रस्तावित है।
मध्यस्थता में पाकिस्तान की भूमिका
पाकिस्तान ने इस संकट में खुद को मध्यस्थ के रूप में पेश किया है। उसने ईरान को अमेरिका (America) की ओर से तैयार 15 सूत्रीय प्रस्ताव सौंपा है।
क्या है 15 सूत्रीय प्रस्ताव?
इस प्रस्ताव में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने, मिसाइल क्षमता में कटौती, क्षेत्रीय समूहों को समर्थन रोकने और बदले में आर्थिक प्रतिबंधों में राहत देने जैसे अहम बिंदु शामिल हैं।
फिलहाल ईरान इस प्रस्ताव पर विचार कर रहा है।
इस्लामाबाद क्यों बना कूटनीति का केंद्र?
विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तान के सऊदी अरब और ईरान दोनों के साथ संतुलित संबंध हैं, जिससे वह इस वार्ता के लिए उपयुक्त मंच बन गया है। पहले यह बैठक तुर्किये में प्रस्तावित थी, लेकिन बाद में इसे इस्लामाबाद स्थानांतरित कर दिया गया।
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क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अहम पहल
विश्लेषकों का मानना है कि यह बैठक पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को कम करने में अहम भूमिका निभा सकती है। यदि कूटनीतिक प्रयास सफल होते हैं, तो यह संभावित बड़े युद्ध को टालने की दिशा में निर्णायक साबित हो सकता है।
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