रूसी तेल खरीद पर कड़ा रुख अपनाया
वॉशिंगटन: अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम(Lindsey Graham) ने भारत, चीन(China) और ब्राजील को चेतावनी देते हुए कहा है कि रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने दावा किया कि डोनाल्ड ट्रंप का मकसद इन देशों को आर्थिक रूप से झटका देना है ताकि यूक्रेन युद्ध को बढ़ावा न मिले।
रूसी तेल पर पाबंदी की तैयारी
लिंडसे ग्राहम(Lindsey Graham) ने एक टीवी कार्यक्रम में बताया कि उन्होंने हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप के साथ गोल्फ खेलते हुए रूस से तेल आयात करने वाले देशों पर चर्चा की। ट्रंप ने स्पष्ट कहा कि ऐसे देशों को कोई छूट नहीं दी जाएगी क्योंकि वे यूक्रेन में युद्ध को लंबा खींचने में योगदान दे रहे हैं।
ग्राहम(Graham) के अनुसार, रूस ने युद्ध रोकने के कोई संकेत नहीं दिए हैं और चीन भी ट्रंप के निशाने पर है। उनका कहना है कि यदि इन देशों पर रोक नहीं लगाई गई तो पुतिन यूक्रेन में अपना सैन्य अभियान जारी रखेंगे।
पुतिन पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की रणनीति
ग्राहम ने कहा कि पुतिन को आर्थिक रूप से कमजोर करने के लिए उनके तेल ग्राहकों पर प्रतिबंध सबसे प्रभावी तरीका है। उन्होंने साफ किया कि ट्रंप, पुतिन के ग्राहकों पर कार्रवाई के लिए तैयार हैं। तेल और गैस राजस्व के बिना रूस की अर्थव्यवस्था डगमगा जाएगी, जिससे युद्ध थमने की संभावना है।
सीनेटर ने यह भी बताया कि ट्रंप का उद्देश्य पुतिन को अपमानित करना नहीं बल्कि समझौते के जरिए तीसरे युद्ध को रोकना है। साथ ही चीन को ताइवान पर कब्जे के लिए उकसाने से भी बचाना है।
यूरोपीय सहयोगियों से बातचीत जारी
ग्राहम ने खुलासा किया कि अलास्का में ट्रंप और पुतिन की संभावित मुलाकात से पहले यूरोपीय देशों से चर्चा हो रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की भी वार्ता प्रक्रिया का हिस्सा बनेंगे ताकि हालात में सुधार हो सके।
लिंडसे ग्राहम ने किन देशों को चेतावनी दी है?
भारत, चीन और ब्राजील को चेतावनी दी गई है।
ट्रंप का रूसी तेल पर क्या रुख है?
वह रूसी तेल खरीदने वाले देशों को किसी भी तरह की छूट नहीं देना चाहते।
ग्राहम के अनुसार पुतिन को कैसे रोका जा सकता है?
तेल और गैस राजस्व कम करके उनकी आर्थिक क्षमता घटाई जा सकती है।
अन्य पढ़े: Israel : इजरायली हमले में 5 पत्रकारों की मौत से मचा हड़कंप