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Middle East: मध्य-पूर्व में महायुद्ध: ईरान-इजराइल-अमेरिका संघर्ष की स्थिति

Dhanarekha
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Middle East: मध्य-पूर्व में महायुद्ध: ईरान-इजराइल-अमेरिका संघर्ष की स्थिति

सातवें दिन भी जारी भीषण हमले

तेल अवीव/तेहरान: 28 फरवरी, 2026 को शुरू हुए इस सैन्य संघर्ष(Middle East) का आज सातवां दिन है। अमेरिकी और इजरायली बलों ने ईरान(Iran) के भीतर महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों, बैलेस्टिक मिसाइल लॉन्चरों और रक्षा प्रणालियों को निशाना बनाना जारी रखा है। इजराइल द्वारा किए गए हालिया हवाई हमलों में ईरान की कई उन्नत मिसाइल प्रणालियां नष्ट हो गई हैं, जिससे ईरान की जवाबी हमला(Counter Attack) करने की क्षमता कमजोर हुई है। संघर्ष अब केवल ईरान तक सीमित न रहकर पूरे खाड़ी क्षेत्र (जैसे कुवैत, बहरीन, यूएई) और लेबनान तक फैल चुका है

भारी मानवीय क्षति और कूटनीतिक संकट

इस युद्ध में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई(Middle East) की मौत के बाद ईरान में नेतृत्व का संकट गहरा गया है। आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार, संघर्ष में अब तक 1,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें भारी संख्या में नागरिक भी शामिल हैं। इजराइल और अमेरिका ने इसे ईरान की सैन्य और परमाणु क्षमताओं को नष्ट करने का एक निर्णायक अवसर माना है, जबकि ईरान इसे अपने अस्तित्व की लड़ाई बता रहा है। दोनों पक्षों की ओर से लगातार मिसाइल और ड्रोन हमले किए जा रहे हैं।

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वैश्विक अर्थव्यवस्था और व्यापार पर असर

युद्ध के कारण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ जैसे रणनीतिक व्यापार मार्ग पर आवाजाही लगभग ठप हो गई है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला बुरी तरह प्रभावित हुई है। कच्चे तेल(Middle East) की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग पूरी तरह चरमरा गई है। मध्य-पूर्व में लाखों यात्री फंसे हुए हैं और एयरस्पेस बंद होने से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर भी बड़ा असर पड़ा है। विश्व भर के शेयर बाजार इस अनिश्चितता के कारण भारी दबाव में हैं।

इस संघर्ष की शुरुआत कब हुई और इसके मुख्य कारण क्या हैं?

यह संघर्ष 28 फरवरी, 2026 को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान के खिलाफ संयुक्त सैन्य हमले से शुरू हुआ। इसका मुख्य उद्देश्य ईरान की बैलेस्टिक मिसाइल क्षमताओं को नष्ट करना, उसके परमाणु कार्यक्रम को रोकना और उसके क्षेत्रीय प्रभाव को कम करना है।

संघर्ष का विस्तार किन-किन देशों तक हो चुका है?

यह युद्ध अब ईरान की सीमाओं से निकलकर पूरे मध्य-पूर्व में फैल गया है। इसके प्रभाव लेबनान, कुवैत, बहरीन, यूएई, ओमान, जॉर्डन और साइप्रस तक देखे जा रहे हैं, जहाँ सैन्य ठिकानों या तेल अवसंरचनाओं पर हमले की खबरें आई हैं।

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