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Nepal: नेपाल के Gen-Z ने सार्वजनिक किया नई सरकार का ब्लूप्रिंट

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Nepal: नेपाल के Gen-Z ने सार्वजनिक किया नई सरकार का ब्लूप्रिंट

काठमांडू, 11 सितंबर 2025 — नेपाल (Nepal) में युवा-Gen-Z समूह ने सरकार गठन एवं संचालन के लिए एक विस्तृत खाका (ब्लूप्रिंट) सार्वजनिक किया है, जिसमें नेताओं को देश छोड़ने से रोकने और उन पर सजा दिलवाने की स्पष्ट मांग शामिल है। हाल ही में हुए प्रदर्शन के बाद युवा समूह यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि सत्ता परिवर्तन सिर्फ कागजी नहीं हो, बल्कि जवाबदेही, पारदर्शिता और लोकतंत्र की गारंटी हो

प्रमुख मांगें और रूपरेखा

युवा समूह ने चिट्ठी जारी कर कहा है कि नेपाल कांग्रेस प्रणाली, भ्रष्टाचार और सांस्थानिक दुरुपयोग की लडाई में खड़ा हुआ है। उनके ब्लूप्रिंट की कुछ महत्वपूर्ण मांगें इस प्रकार हैं:

  • पार्लियामेंट को भंग करना और एक अंतरिम नागरिक-सेन्य सरकार (Civil-Military Interim Government) की स्थापना करना।
  • सेना की भूमिका नियंत्रण में रखना और कार्य-पालिका तथा नीति निर्धारण में नागरिक शासन की वरीयता देना।
  • अगले 6-12 महीनों में आम चुनाव करवा कर लोकतांत्रिक तरीके से सरकार की बहाली।
  • भ्रष्ट नेताओं, नौकरशाहों और प्रशासन के प्रतिनिधियों की पता लगाने हेतु स्वतंत्र न्यायिक आयोग का गठन, विशेष भूमिका भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग की जांच में।
  • हिंसक घटनाओं, तोड़फोड़ और प्रदर्शन के दौरान अधिकारियों द्वारा गोली चलाने आदि की शिकायतों की निष्पक्ष जांच।

नेता भागने से कैसे रोका जाए

ब्लूप्रिंट में यह भी कहा गया है कि जो नेता वर्तमान में विभागों, राजनीतिक कार्यालयों या सार्वजनिक पदों पर हैं या जिन्होंने भ्रष्टाचार आदि के आरोपों से बचने के लिए देश छोड़ने की कोशिश की हो, उन्हें ऐसा करने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए। यदि कोई स्वेच्छा से देश नहीं लौटे, तो कानूनी प्रक्रिया शुरू हो और उन्हें रोकने के लिए न्यायालयीन आदेशों एवं अंतर्राज्यीय सहयोग का उपयोग किया जाए।

युवाओं का उद्देश्य

Gen-Z ग्रुप का कहना है कि उनका आंदोलन विनाश या संघर्ष के लिए नहीं है, बल्कि “उत्तरदायित्व, न्याय, पारदर्शिता” की ओर एक पुकार है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि हिंसा, आगजनी और उपद्रव की घटनाएँ उनकी योजना या उद्देश्यों का हिस्सा नहीं हैं, और उनसे जुड़े लोगों की पहचान होनी चाहिए तथा न्याय के दायरे में लाया जाना चाहिए।

चुनौतियाँ और आगे की राह

ब्लूप्रिंट लागू करना आसान नहीं होगा। राजनीतिक दल, वर्तमान सत्ता संरचनाएँ, अदालतें और सुरक्षा बल सभी इस परिवर्तन की दिशा में बाधा हो सकते हैं। इसके अलावा, अंतरिम सरकार की विश्वसनीयता और निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी निगरानी की आवश्यकता है।

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