IRAN- जंग का नया चरण, ईरान में औद्योगिक और मेडिकल ढांचे पर भीषण हमले

Read Time:  1 min
ईरान
ईरान
FONT SIZE
GET APP

तेहरान। मिडिल-ईस्ट में जारी संघर्ष अब एक अत्यंत विनाशकारी और खतरनाक चरण में प्रवेश कर गया है। अमेरिका और इज़रायल की वायु सेनाओं ने ईरान (Iran) के भीतर सैन्य ठिकानों के साथ-साथ अब सिविलियन और आर्थिक इंफ्रास्ट्रक्चर को बड़े पैमाने पर निशाना बनाना शुरू कर दिया है।

जंग का नया और खतरनाक चरण

ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, इस्फ़हान के एयरपोर्ट और होर्मोज़गान (Airport and Harmojgan) के बंदरगाहों सहित रणनीतिक महत्व के कई नागरिक क्षेत्रों पर भारी बमबारी की गई है।

शांति की उम्मीदें धुंधली

डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के हालिया कड़े रुख के बाद शांति की उम्मीदें पूरी तरह टूटती नजर आ रही हैं और जंग अब एक ऐसी दिशा में मुड़ गई है जहां अंतरराष्ट्रीय नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

नागरिक ठिकाने बने निशाना

जंग के इस नए फेज का सबसे भयावह पहलू रिहायशी और मानवीय सहायता से जुड़े ठिकानों पर हो रहे हमले हैं। तेहरान में एक सदी पुराने पाश्चर इंस्टीट्यूट जैसे प्रतिष्ठित मेडिकल रिसर्च सेंटर, प्रमुख पुलों, अस्पतालों और स्टील प्लांटों को तबाह किया जा रहा है।

अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से हस्तक्षेप की मांग

ईरानी स्वास्थ्य मंत्रालय ने इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा और जिनेवा कन्वेंशन का सीधा उल्लंघन बताते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन और रेड क्रॉस से हस्तक्षेप की अपील की है।

अर्थव्यवस्था और सप्लाई चेन पर हमला

विशेषज्ञों का मानना है कि इन हमलों का उद्देश्य केवल सैन्य क्षमता घटाना नहीं, बल्कि ईरान की सप्लाई चेन और अर्थव्यवस्था को पूरी तरह ध्वस्त कर उसे पाषाण युग में धकेलना है।

बढ़ती मौतें और तबाही का आंकड़ा

जमीनी हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि फरवरी के अंत से अब तक ईरान में अमेरिकी और इज़रायली हमलों में करीब 2,076 लोग जान गंवा चुके हैं, जबकि 26,500 से अधिक घायल हुए हैं।

लेबनान मोर्चे पर भी तनाव

उधर, इज़रायली सेना ने लेबनान में हिज़्बुल्लाह के 40 से अधिक लड़ाकों को मार गिराने का दावा किया है, जिसके जवाब में हिज़्बुल्लाह ने भी उत्तरी इज़रायल पर मिसाइलें दागी हैं।

अंतरराष्ट्रीय कानून पर उठे सवाल

कानूनी मोर्चे पर भी अमेरिका के भीतर ही विरोध के स्वर उठने लगे हैं। हार्वर्ड, येल और स्टैनफोर्ड जैसे संस्थानों के 100 से अधिक अंतरराष्ट्रीय कानून विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना युद्ध अपराध की श्रेणी में आ सकता है।

जिनेवा कन्वेंशन का उल्लंघन?

1949 के जिनेवा कन्वेंशन के तहत युद्ध के दौरान आम नागरिकों और उनकी संपत्तियों को निशाना बनाना अमानवीय कृत्य माना जाता है।

ईरान का सख्त रुख, युद्ध जारी रखने की चेतावनी

बावजूद इसके, ईरान की सेना ने पीछे हटने से इनकार करते हुए सरेंडर के बजाय युद्ध जारी रखने की चेतावनी दी है, जिससे पूरे क्षेत्र में तबाही का मंजर और गहराने की आशंका है।

Read More :

Anuj Kumar

लेखक परिचय

Anuj Kumar

सूचना : इस वेबसाइट पर प्रकाशित खबरें केवल पाठकों की जानकारी के उद्देश्य से दी जाती हैं। हम अपनी ओर से यथासंभव सही और सटीक जानकारी प्रदान करने का प्रयास करते हैं।