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Breaking News: New PM: नई PM की कार्यशैली पर विवाद

Author Icon By Dhanarekha
Updated: November 14, 2025 • 5:16 PM
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‘घोड़े की तरह काम करें’

बीजिंग: जापान की नई प्रधानमंत्री साने ताकाइची(New PM) अपने पहले दिन से ही अपने कठोर कार्यशैली(Harsh Work Style) और “काम, काम, काम” के रवैये के कारण चर्चा में हैं। उन्होंने दावा किया है कि वह 18 घंटे काम करती हैं और वर्क लाइफ बैलेंस में विश्वास नहीं रखतीं

विवादास्पद मीटिंग: ताकाइची(New PM) ने हाल ही में संसद के बजट सत्र की तैयारी के लिए सुबह 3 बजे अपने सलाहकारों(Consultants) के साथ एक मीटिंग (जिसे ‘3 ए.एम. स्टडी सेशन’ कहा गया) बुलाई, जिस पर देश में बड़ा विवाद खड़ा हो गया।

पूर्व PM की आलोचना: मुख्य विपक्षी दल के नेता और पूर्व प्रधानमंत्री योशिहिको नोदा ने इस फैसले को “पागलपन” बताते हुए आलोचना की। नोदा ने कहा कि पीएम को दूसरों को इस तरह के समय पर काम में शामिल नहीं करना चाहिए, क्योंकि उस समय हर कोई सो रहा होता है।

सफाई: विवाद बढ़ने पर ताकाइची ने सफाई दी कि उनकी घर की फैक्स मशीन खराब हो गई थी, इसलिए उन्हें प्रधानमंत्री आवास पर जल्दी जाकर तैयारी करनी पड़ी।

ओवरटाइम लिमिट बढ़ाने पर विचार और ‘करोशी’ का डर

ताकाइची(New PM) की यह कठोर कार्यशैली ऐसे समय में सामने आई है जब सरकार ओवरटाइम की ऊपरी सीमा बढ़ाने पर विचार कर रही है, जिसका उन्होंने खुद समर्थन किया है। यह कदम जापान में दशकों पुराने ‘करोशी’ यानी ‘ओवरवर्क से मौत’ के कल्चर के वापस लौटने के डर को बढ़ा रहा है।

करोशी क्या है?: दूसरे विश्व युद्ध के बाद जापान के तेजी से आर्थिक विकास के दौरान काम का अत्यधिक दबाव बढ़ा, जिसके कारण दिल के दौरे और तनाव से अचानक होने वाली मौतों को ‘करोशी’ कहा गया।

मौजूदा नियम: वर्तमान में, जापान में काम करने की मानक सीमा 8 घंटे प्रति दिन है, और ओवरटाइम की सीमा प्रति माह 45 घंटे है। सरकार इस सीमा को और बढ़ाने पर विचार कर रही है।

आलोचना: आलोचकों का मानना है कि पीएम ताकाइची गलत मिसाल पेश कर रही हैं, और ओवरटाइम लिमिट बढ़ाने से कर्मचारियों पर अनावश्यक दबाव बढ़ेगा।

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जापान में ज्यादा काम करने के कल्चर का इतिहास

जापान में ज्यादा काम करने का कल्चर 1945 में दूसरे विश्व युद्ध के बाद देश को फिर से खड़ा करने की जरूरत से उपजा। सरकार और कंपनियों ने देश को बचाने के लिए ज्यादा काम करने की सलाह दी।

लाइफटाइम जॉब मॉडल: इस दौरान जापानी कंपनियों ने ‘लाइफटाइम जॉब मॉडल’ शुरू किया, जिसमें कर्मचारियों को आजीवन नौकरी दी जाती थी। इसके बदले में, कर्मचारियों से ‘पूरी वफादारी’ और ‘लंबे घंटे काम’ करने की उम्मीद की जाती थी।

परिणाम: इस कल्चर के कारण जापान दुनिया की सबसे तेज इकोनॉमी में से एक बन गया, लेकिन 1960-70 के दशक में कर्मचारियों के स्वास्थ्य पर इसका बुरा असर दिखने लगा और काम के दौरान होने वाली मौतों के कारण ‘करोशी’ शब्द सामने आया।

पहला मामला: मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 1969 में 29 साल के एक शख्स की ब्रेन स्ट्रोक से मौत हुई, जिसे ओवरवर्क से हुई मौत का पहला मामला माना गया था।

जापान में ‘करोशी’ क्या है और यह शब्द क्यों चर्चा में आया था?

‘करोशी’ (Karoshi) का अर्थ है ‘ओवरवर्क से मौत’। यह शब्द जापान में 1960-70 के दशक में तब चर्चा में आया जब देश के तेज आर्थिक विकास के दौरान अत्यधिक काम के दबाव के कारण कई लोग दिल के दौरे और तनाव से अचानक मरने लगे। डॉक्टरों ने इसे अत्यधिक काम से जुड़ी मौत के रूप में पहचाना।

प्रधानमंत्री साने ताकाइची की कार्यशैली की आलोचना का मुख्य कारण क्या है?

प्रधानमंत्री साने ताकाइची की आलोचना का मुख्य कारण उनका 18 घंटे काम करने का दावा और सुबह 3 बजे मीटिंग बुलाने का फैसला है। आलोचकों का कहना है कि वह एक गलत मिसाल पेश कर रही हैं और उनकी यह कार्यशैली, सरकार द्वारा ओवरटाइम की सीमा बढ़ाने के विचार के साथ मिलकर, जापान में ओवरवर्क (करोशी) के पुराने कल्चर को वापस ला सकती है।

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