पाकिस्तानी नागरिकों पर बढ़ी सख्ती
इस्लामाबाद: संयुक्त अरब अमीरात(UAE) में पाकिस्तानी(Pakistan) नागरिकों के खिलाफ बढ़ती कार्रवाई को लेकर पाकिस्तान सरकार एक बार फिर चर्चा में है। हाल के वर्षों में हजारों पाकिस्तानी नागरिकों को खाड़ी देशों से वापस भेजा गया है। इसके बावजूद पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इस मुद्दे को गंभीर मानने से इनकार कर दिया है। उनके बयान के बाद पाकिस्तान में राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है।
ख्वाजा आसिफ के बयान पर विवाद
ख्वाजा आसिफ ने इस्लामाबाद(Islamabad) में दिए एक इंटरव्यू में कहा कि अगर कुछ लोग यूएई में नियम तोड़ते हैं या भीख मांगते पाए जाते हैं तो उन्हें निकाला जाना सामान्य प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि लाखों पाकिस्तानी विदेशों में सम्मानजनक काम कर रहे हैं और कुछ लोगों की वजह से पूरे समुदाय को गलत नहीं ठहराया जा सकता। हालांकि उनके इस बयान को लेकर विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने नाराजगी जताई है। इसके अलावा सोशल मीडिया पर भी लोगों ने सरकार के रवैये की आलोचना की है।
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खाड़ी देशों में बढ़ी निगरानी
पिछले पांच वर्षों में खाड़ी देशों से करीब 1.64 लाख पाकिस्तानी नागरिकों को वापस भेजे जाने के आंकड़े सामने आए हैं। इनमें सबसे ज्यादा संख्या सऊदी अरब और यूएई से निकाले गए लोगों की रही है। वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ती घटनाओं के कारण पाकिस्तानी नागरिकों के लिए वीजा नियम और सख्त हो सकते हैं। विदेशों में रोजगार तलाश रहे लोगों पर इसका सीधा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। पाकिस्तान सरकार अब कौशल आधारित रोजगार और यात्रा निगरानी को मजबूत करने की बात कर रही है।
खाड़ी देशों से निष्कासन क्यों बढ़ रहा है?
विशेषज्ञों के अनुसार कई मामलों में भीख मांगने, अवैध गतिविधियों और वीजा नियमों के उल्लंघन की शिकायतें सामने आई हैं। इसी कारण खाड़ी देशों ने निगरानी बढ़ाई है और नियम तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई की जा रही है।
इस घटनाक्रम का पाकिस्तान पर क्या असर पड़ेगा?
विदेशों में काम करने वाले पाकिस्तानी नागरिकों की छवि पर इसका असर पड़ सकता है। साथ ही नए वीजा मिलने में कठिनाई और रोजगार अवसरों में कमी जैसी चुनौतियां भी बढ़ सकती हैं।
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