Pak: एआई ड्रोन से बदलेगी हवाई जंग

Read Time:  1 min
Pak
Pak
FONT SIZE
GET APP

भारत-पाक में यूसीएवी मुकाबले की तैयारी

इस्लामाबाद: भारत और पाकिस्तान(Pak) के बीच भविष्य में हवाई युद्ध का स्वरूप पूरी तरह बदल सकता है। दोनों देश अब मानव रहित लड़ाकू विमान यानी यूसीएवी तकनीक पर तेजी से काम कर रहे हैं। पाकिस्तान(Pak) तुर्की के किजिलेल्मा ड्रोन में रुचि दिखा रहा है, जबकि भारत बोइंग के एमक्यू-28 घोस्ट बैट जैसे आधुनिक सहयोगी लड़ाकू विमान पर विचार कर रहा है। इसके जरिए एआई आधारित युद्ध क्षमता को मजबूत करने की कोशिश हो रही है

किजिलेल्मा पर पाकिस्तान की नजर

तुर्की(Turkey) का किजिलेल्मा ड्रोन और ऑस्ट्रेलिया(Australia) से जुड़ा एमक्यू-28 घोस्ट बैट इस समय रक्षा विशेषज्ञों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं। पाकिस्तान वायुसेना प्रमुख जहीर अहमद सिद्धू की हालिया तुर्की यात्रा भी इसी तकनीक पर केंद्रित मानी जा रही है। वहीं किजिलेल्मा को स्टील्थ क्षमता और एआई मिशन सिस्टम से लैस किया गया है। इसके जरिए दुश्मन के हवाई क्षेत्र में बिना पायलट के अभियान चलाए जा सकते हैं। इसके अलावा यह ड्रोन लड़ाकू विमानों के साथ मिलकर मिशन को अंजाम देने में सक्षम माना जा रहा है।

अन्य पढ़े: Ebola Virus : इन तीन देशों की यात्रा से बचें, भारत सरकार की एडवाइजरी

भारत की एमक्यू-28 योजना

भारत की ओर से बोइंग एमक्यू-28 घोस्ट बैट को भविष्य की हवाई रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है। यह विमान लंबी दूरी तक मिशन जारी रखने और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध जैसी क्षमताओं के लिए तैयार किया गया है। वहीं इसका मॉड्यूलर सिस्टम जरूरत के अनुसार अलग-अलग मिशनों में उपयोग की सुविधा देता है। रक्षा जानकारों का मानना है कि आने वाले वर्षों में एआई आधारित ड्रोन तकनीक दक्षिण एशिया की सैन्य ताकत को नई दिशा दे सकती है। इससे पारंपरिक लड़ाकू विमानों की भूमिका में भी बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

भविष्य की जंग में यूसीएवी कितने अहम होंगे?

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यूसीएवी भविष्य के युद्ध में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। ये विमान कम जोखिम में दुश्मन के इलाके में मिशन पूरा करने की क्षमता रखते हैं। एआई तकनीक के कारण इनकी प्रतिक्रिया और निगरानी क्षमता भी काफी तेज मानी जा रही है।

एमक्यू-28 और किजिलेल्मा में क्या अंतर है?

किजिलेल्मा को तेज आक्रमण और स्टील्थ मिशन के लिए डिजाइन किया गया है। दूसरी ओर एमक्यू-28 लंबी अवधि के मिशन, खुफिया जानकारी जुटाने और सहयोगी लड़ाकू विमान के रूप में ज्यादा प्रभावी माना जाता है। दोनों की रणनीतिक भूमिका अलग-अलग बताई जा रही है।

अन्य पढ़े:

Dhanarekha

लेखक परिचय

Dhanarekha

सूचना : इस वेबसाइट पर प्रकाशित खबरें केवल पाठकों की जानकारी के उद्देश्य से दी जाती हैं। हम अपनी ओर से यथासंभव सही और सटीक जानकारी प्रदान करने का प्रयास करते हैं।