Nepal: अब अंतरिम नेता बनीं पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की

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sushila karki
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काठमांडू, 11 सितम्बर 2025 – नेपाल (Nepal) में कई दिनों से चल रहे बड़े आंदोलन और हिंसा के बीच अब एक नया मोड़ आ गया है। प्रदर्शन कर रहे युवाओं और नेताओं की बातचीत के बाद देश की पहली महिला चीफ जस्टिस रह चुकीं सुशीला कार्की (Sushila karki) को अंतरिम सरकार का नेतृत्व करने के लिए आगे लाने की तैयारी है

क्यों चुनी गईं कार्की?

सुशीला कार्की किसी भी राजनीतिक पार्टी से जुड़ी नहीं रही हैं। वे सुप्रीम कोर्ट की चीफ जस्टिस रह चुकी हैं और अपनी ईमानदारी और सख्त फैसलों के लिए जानी जाती हैं। यही वजह है कि युवा आंदोलन कर रहे लोग उन्हें भरोसेमंद चेहरा मान रहे हैं। उनका मानना है कि कार्की राजनीति से बाहर रहकर एक निष्पक्ष नेता साबित हो सकती हैं।

आंदोलन की पृष्ठभूमि

नेपाल में यह आंदोलन तब शुरू हुआ जब सरकार ने सोशल मीडिया पर पाबंदी लगाने की कोशिश की। सरकार ने कहा कि कंपनियों को नेपाल में रजिस्टर होना होगा और उनके कंटेंट पर निगरानी रखी जाएगी। युवाओं को यह कदम अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमला लगा और देखते ही देखते पूरे देश में विरोध फैल गया।
हालांकि सरकार ने यह फैसला वापस ले लिया, लेकिन गुस्सा वहीं नहीं रुका। लोग अब भ्रष्टाचार, बेरोज़गारी और नेताओं की नाकामी को लेकर भी सड़कों पर हैं।

कार्की ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी नाम लिया और कहा कि वे उनकी कार्यशैली से प्रभावित हैं. उन्होंने कहा, ‘मोदी जी को नमस्कार, मेरे जेहन में मोदी जी के लिए अच्छा इंप्रेशन है.’ कार्की ने भारत के और नेताओं की भी तारीफ की मगर नाम नहीं लिया.

कार्की का प्लान

सुशीला कार्की ने साफ कहा है कि वे अंतरिम सरकार सिर्फ कुछ महीनों के लिए संभालेंगी। उनका मकसद है कि जल्द से जल्द निष्पक्ष चुनाव कराए जाएं ताकि एक स्थायी सरकार बन सके। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि आंदोलन में जिन लोगों की मौत हुई है या जिन्हें नुकसान हुआ है, उनकी मदद करना उनकी प्राथमिकता होगी।

आगे की चुनौतियां

  • कार्की के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी कानून-व्यवस्था संभालना, क्योंकि देश में तनाव अभी भी जारी है।
  • लोगों की उम्मीदें बहुत ऊंची हैं। अगर बदलाव जल्दी नहीं दिखा तो गुस्सा और भड़क सकता है।
  • पड़ोसी देश भारत और चीन की नजर भी नेपाल की राजनीति पर है, इसलिए बाहरी दबाव भी बना रहेगा।

नतीजा

फिलहाल नेपाल एक अहम मोड़ पर खड़ा है। सुशीला कार्की की अगुवाई वाली अंतरिम सरकार युवाओं के भरोसे पर खरी उतरेगी या नहीं, ये आने वाले दिनों में साफ होगा। लेकिन इतना तय है कि यह कदम देश में स्थिरता लाने की कोशिश है।

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