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Pakistan: एस. जयशंकर के ‘दलाल’ बयान पर भड़का पाकिस्तान

Dhanarekha
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Pakistan: एस. जयशंकर के ‘दलाल’ बयान पर भड़का पाकिस्तान

हिना रब्बानी खार ने जताई कड़ी आपत्ति

इस्लामाबाद: यह पूरा विवाद भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर के उस बयान से शुरू हुआ, जो उन्होंने बुधवार को एक सर्वदलीय बैठक में दिया था। पश्चिम एशिया (ईरान-इजराइल) संघर्ष में पाकिस्तान(Pakistan) की मध्यस्थता की कोशिशों से जुड़े सवाल पर जयशंकर ने तीखा प्रहार करते हुए कहा था कि भारत इस तरह की किसी भूमिका में नहीं है क्योंकि “हम दलाल देश नहीं हैं।” उन्होंने यह भी संकेत दिया कि पाकिस्तान का इस्तेमाल 1981 से ही अमेरिका(America) द्वारा किया जाता रहा है, और इसमें कुछ भी नया नहीं है

हिना रब्बानी खार और पाकिस्तान की प्रतिक्रिया

जयशंकर के इस बयान पर पाकिस्तान(Pakistan) की पूर्व विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार ने कड़ी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर इसे ‘सियासी ड्रामेबाजी’ करार देते हुए कहा कि यह देखना दुखद है कि पूरा क्षेत्र ऐसी सोच का बंधक बना हुआ है। खार से पहले पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय(Foreign Ministry) ने भी इस टिप्पणी को ‘गैर-कूटनीतिक’ बताते हुए खारिज कर दिया था। पाकिस्तान का तर्क है कि जब तर्क कमजोर पड़ जाते हैं, तब अपशब्दों का सहारा लिया जाता है, और भारत का यह बयान उसकी हताशा को दर्शाता है।

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मध्यस्थता की होड़ और क्षेत्रीय तनाव

वर्तमान में पाकिस्तान खुद को ईरान युद्ध में एक बड़े मध्यस्थ के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है। इस्लामाबाद चाहता है कि अमेरिकी और ईरानी नेता वहां बैठकर सीजफायर पर बात करें। पाकिस्तान(Pakistan) लगातार यह दावा कर रहा है कि इस संघर्ष को रुकवाने में उसकी भूमिका भारत से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। जयशंकर का बयान इसी दावे पर एक सीधा कूटनीतिक हमला था, जिसने पाकिस्तान के राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है और दोनों देशों के बीच वाकयुद्ध को और तेज कर दिया है।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने किस संदर्भ में ‘दलाल देश’ शब्द का प्रयोग किया?

जयशंकर ने यह टिप्पणी सर्वदलीय बैठक में पाकिस्तान द्वारा ईरान युद्ध में की जा रही मध्यस्थता की कोशिशों के संदर्भ में की थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत कूटनीति में इस तरह की भूमिका (बिचौलिए या दलाल की) नहीं निभाता।

हिना रब्बानी खार ने भारत के रुख पर क्या आलोचना की है?

हिना रब्बानी खार ने कहा कि इस तरह की टिप्पणी पूरे क्षेत्र के लिए अच्छा संकेत नहीं है और यह भारतीय नेतृत्व की ‘सियासी ड्रामेबाजी’ को दर्शाता है, जिससे पूरा इलाका प्रभावित हो रहा है।

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