Nepal: नेपाल में ‘बालेन’ युग का उदय

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सबसे युवा प्रधानमंत्री ने ली शपथ

काठमांडू: बालेन्द्र (बालेन) शाह नेपाल(Nepal) के इतिहास के सबसे कम उम्र के प्रधानमंत्री बन गए हैं। राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण के तुरंत बाद बालेन ने एक रैप गाने के जरिए देश को अपना पहला संदेश दिया, जिसमें उन्होंने भ्रष्टाचार के खात्मे और सिस्टम में बदलाव का आह्वान किया। उनकी पार्टी, राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) ने हालिया चुनावों में 275 में से 182 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत हासिल किया है, जो नेपाल की गठबंधन राजनीति के इतिहास में एक दुर्लभ घटना है

मधेशी पहचान और राजनीतिक समीकरण

बालेन शाह नेपाल के दक्षिणी हिस्से यानी मधेश(Nepal) क्षेत्र से आने वाले पहले प्रधानमंत्री हैं। भारत(India) की सीमा से सटे इस इलाके के लोगों को ‘मधेशी’ कहा जाता है, जो लंबे समय से काठमांडू की सत्ता में अपनी उचित हिस्सेदारी के लिए संघर्ष कर रहे थे। बालेन का पीएम बनना नेपाल के सामाजिक और राजनीतिक संतुलन के लिए एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है। पेशे से इंजीनियर बालेन ने अपनी उच्च शिक्षा भारत के कर्नाटक से पूरी की है, जो उनके विजन में आधुनिकता और तकनीकी समझ को जोड़ता है।

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मेयर से पीएम तक का सफर और चुनौतियां

बालेन की लोकप्रियता 2022 में काठमांडू के मेयर बनने से शुरू हुई थी, जहाँ उन्होंने निर्दलीय चुनाव जीतकर सबको चौंका दिया था। उनके द्वारा अवैध निर्माण(Nepal) पर की गई कार्रवाई और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख ने उन्हें युवाओं और ‘GenZ’ पीढ़ी का मसीहा बना दिया। अब प्रधानमंत्री के रूप में उनके सामने 12 लाख नौकरियां पैदा करने, धीमी अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने और कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करने की बड़ी चुनौतियां हैं। नई कैबिनेट में सुधन गुरुंग को गृह और शिशिर खनाल को विदेश मंत्रालय जैसी अहम जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

बालेन शाह की पार्टी (RSP) ने चुनाव में कितनी सीटें जीती हैं?

उनकी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) ने नेपाल की 275 सदस्यीय संसद में 182 सीटें जीतकर भारी बहुमत हासिल किया है। उन्होंने खुद झापा-5 सीट से पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को हराकर अपनी ताकत साबित की।

बालेन शाह को ‘GenZ’ और युवाओं का नेता क्यों माना जाता है?

बालेन ने पारंपरिक राजनीति से हटकर सोशल मीडिया और रैप म्यूजिक को अपना हथियार बनाया। उनके गानों में भ्रष्टाचार और बेरोजगारी के खिलाफ युवाओं का गुस्सा झलकता है, जिससे वे नई पीढ़ी के बीच एक प्रतीक (Icon) बनकर उभरे हैं।

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