इस्लामाबाद । बलूचिस्तान पाकिस्तान (Pakistan) के हाथ से धीरे-धीरे निकल रहा है। बलूचों का विद्रोह लगातार बढ़ रहा है और आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र अलग देश के रूप में स्थापित हो सकता है।
भारत विरोधी नैरेटिव से दबाव बनाने की कोशिश
पाकिस्तान, बलूचों के साथ संवाद और गायब युवाओं को वापस लाने के बजाय, भारत विरोधी नैरेटिव फैला रहा है। पाकिस्तान का मानना है कि भारत को दोषी ठहराकर और कथित भारतीय हस्तक्षेप को उजागर करके बलूच विद्रोह को दबाया जा सकता है।
सेना प्रमुख असीम मुनीर की रणनीति
भारतीय शीर्ष खुफिया सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान सेना प्रमुख असीम मुनीर (Pakistan Army Chief Asim Munir) पुरानी रणनीति अपना रहे हैं, जिसमें बलूचिस्तान में विद्रोह को भारत से जोड़ा जाता है। उनका उद्देश्य पाकिस्तान सेना की स्थिति मजबूत करना और अंतरराष्ट्रीय व घरेलू स्तर पर सुरक्षा की छवि बनाए रखना है।
मुनीर का फोकस घरेलू दर्शकों पर
खुफिया सूत्रों का मानना है कि मुनीर का फोकस अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अधिक घरेलू दर्शकों पर है। पाकिस्तान इस समय गंभीर आर्थिक संकट, राजनीतिक अस्थिरता और सेना की गिरती साख से जूझ रहा है।
बलूचिस्तान की वास्तविक स्थिति
बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगियां, कथित फर्जी मुठभेड़ और विकास परियोजनाओं में बाधा जैसी घटनाओं ने सेना की वैधता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। भारत-विरोधी बयानबाजी जनता का ध्यान जमीनी मुद्दों से हटाने और सेना को बलूचिस्तान (Bloochistan) का संरक्षक दिखाने का माध्यम बनती है।
रणनीति अस्थायी लाभ देती है
हालांकि, भारतीय सूत्रों का कहना है कि यह रणनीति घरेलू दर्शकों को भटका सकती है, लेकिन वास्तविक जमीनी हालात में कोई बदलाव नहीं लाती। बलूचों का असंतोष और विद्रोह लगातार फैल रहा है, और केवल भारत विरोधी बयानबाजी से पाकिस्तान की पकड़ मजबूत नहीं होती।
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असीम मुनीर की रणनीति का निष्कर्ष
असीम मुनीर की यह रणनीति सेना की कमजोर होती पकड़ को स्थायी रूप से मजबूत करने के बजाय अस्थायी ध्यानाकर्षण का साधन प्रतीत होती है।
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