इस्लामाबाद। पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा के लांडी कोटल इलाके में अपनी मांग को लेकर लोग सड़कों पर उतर गए हैं। लोगों की मांग है कि तोरखम बॉर्डर (Torkham Border) को फिर खोल दिया जाए। लोकल मीडिया के मुताबिक ऑल बॉर्डर्स कोऑर्डिनेटर्स काउंसिल के बैनर तले लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। इस विरोध प्रदर्शन में व्यापारी, ट्रांसपोर्टर, कबीलाई बुजुर्ग, दिहाड़ी मजदूर और राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता शामिल हुए। रिपोर्ट के मुताबिक 12 अक्टूबर से अफगानिस्तान (Afganistan) के साथ बॉर्डर बंद होने से सीधे तौर पर प्रभावित हुए अलग-अलग संगठनों और ग्रुप के प्रतिनिधियों ने विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया।
बॉर्डर बंदी से हजारों लोगों की आजीविका प्रभावित
प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि तोरखम बॉर्डर बंद होने की वजह से हजारों लोगों की आर्थिक रूप से “हत्या” हुई है। इनमें से ज्यादातर वे लोग हैं, जो पूरी तरह बॉर्डर पार के व्यापार पर निर्भर थे। उन्होंने तोरखम बॉर्डर को मध्य एशिया का एक अहम बिजनेस गेटवे (Business Gateway) बताते हुए कहा कि यह सीमा पार मार्ग हजारों परिवारों के लिए आर्थिक हब था और इसी से उनकी रोजी-रोटी जुड़ी हुई थी।
शहर में ठप पड़ी व्यावसायिक गतिविधियां
प्रदर्शनकारियों के मुताबिक बॉर्डर बंद होने से शहर में सभी कमर्शियल गतिविधियां बंद हो चुकी हैं। लोगों ने कहा कि सीमा बंदी के कारण सैकड़ों परिवारों को भारी गरीबी और आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। कई लोग रोजमर्रा का खर्च चलाने के लिए कर्ज लेने को मजबूर हैं।
अफगान वार्ता में स्थानीय प्रतिनिधियों को शामिल करने की मांग
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि प्रभावशाली कबायली बुजुर्गों और व्यापार प्रतिनिधियों को भविष्य में पाकिस्तान-अफगानिस्तान शांति और व्यापार वार्ता का हिस्सा बनाया जाए। उनका कहना था कि ये लोग पहले भी दोनों देशों के बीच जटिल मुद्दों को सुलझाने में अहम भूमिका निभाते रहे हैं।
दिहाड़ी मजदूरों पर सबसे ज्यादा असर
एक पाकिस्तानी अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक तोरखम बॉर्डर के लंबे समय तक बंद रहने से दिहाड़ी मजदूरों और कुलियों की आर्थिक हालत बेहद खराब हो गई है। सीमा पर तनाव के कारण उनकी पार्ट-टाइम नौकरियां खत्म हो गई हैं। कई मजदूर पंजाब और सिंध में काम की तलाश कर रहे हैं, जबकि कुछ लोग रिश्तेदारों और दोस्तों से उधार लेकर गुजारा कर रहे हैं।
बच्चों की पढ़ाई छूटी, मानसिक तनाव बढ़ा
रिपोर्ट में कहा गया है कि कई परिवारों के पास स्कूल फीस भरने तक के पैसे नहीं हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई छूट गई है। हालात इतने खराब हैं कि लोग मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं और कुछ ने इससे उबरने के लिए ड्रग्स का सहारा लेना शुरू कर दिया है।
गरीबी के कारण पढ़ाई छोड़ी, मजदूरी को मजबूर
रिपोर्ट के अनुसार मंसूर अली ने बताया कि गरीबी के चलते उसे कंप्यूटर साइंस का कोर्स बीच में ही छोड़ना पड़ा। अब वह थोड़े से पैसे के लिए बॉर्डर पॉइंट और टैक्सी स्टैंड के बीच अफगान और पाकिस्तानी नागरिकों का सामान ढोने का काम कर रहा है।
युवाओं के कट्टरपंथ की ओर जाने का खतरा
तोरखम लेबरर्स एंड पोर्टर्स एसोसिएशन के नेता ने आशंका जताई कि बेरोजगारी से जूझ रहे युवा मजदूर प्रतिबंधित आतंकी संगठनों की ओर आकर्षित हो सकते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि आतंकी संगठन और नशा तस्कर इन निराश युवाओं की कमजोर हालत का फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं।
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