राफेल से बेहतर होने का दावा
सियोल: दक्षिण कोरिया(South Korea) ने रक्षा क्षेत्र में अपनी आत्मनिर्भरता का लोहा मनवाते हुए अपना पहला स्वदेशी 4.5 जेनरेशन का फाइटर जेट KF-21 बोरामे औपचारिक रूप से पेश कर दिया है। आश्चर्यजनक बात यह है कि इस विमान ने 2022 में अपनी पहली उड़ान भरी थी और मात्र 4 साल के भीतर यह प्रोडक्शन स्टेज पर पहुंच गया है। कोरिया एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (KAI) ने इसे ‘पांचवीं पीढ़ी के करीब’ बताया है। जहाँ भारत का AMCA प्रोजेक्ट अभी विकास के चरण में है, वहीं दक्षिण कोरिया ने इतनी कम अवधि में इस एडवांस्ड विमान को उतारकर दुनिया को हैरान कर दिया है।
राफेल और टाइफून से तुलना
KF-21 को फ्रांसीसी लड़ाकू विमान ‘राफेल’ और ‘यूरोफाइटर टाइफून’ का कड़ा प्रतिस्पर्धी माना जा रहा है। दक्षिण कोरियाई(South Korea) विशेषज्ञों का दावा है कि KF-21 का प्रदर्शन इन दोनों विमानों से बेहतर है। हालांकि इसे 4.5 जेनरेशन का बताया गया है, लेकिन इसके रडार और स्टील्थ फीचर्स इसे 5वीं पीढ़ी के विमानों (जैसे F-35) के काफी करीब ले आते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य कम लागत में उच्च तकनीक प्रदान करना है, ताकि उत्तर कोरिया जैसे संभावित खतरों का प्रभावी ढंग से मुकाबला किया जा सके।
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वैश्विक बाजार और भारत का पड़ोसी खरीदार
इस प्रोजेक्ट की शुरुआत दक्षिण कोरिया और इंडोनेशिया ने मिलकर की थी। हालांकि इंडोनेशिया को कुछ आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन वह अभी भी इस विमान का पहला विदेशी खरीदार बनने की दौड़ में सबसे आगे है। भारत के पड़ोसी देशों और दक्षिण-पूर्व एशिया में इस विमान की मांग बढ़ने की संभावना है। इंडोनेशिया के अलावा संयुक्त अरब अमीरात (UAE), सऊदी अरब, फिलीपींस और पोलैंड जैसे देशों ने भी इस किफायती और शक्तिशाली फाइटर जेट में गहरी रुचि दिखाई है।
KF-21 फाइटर जेट को ‘4.5 जेनरेशन’ का क्यों कहा जा रहा है?
KF-21 को चौथी पीढ़ी (जैसे F-16) और पांचवीं पीढ़ी (जैसे F-35) के बीच के अंतर को पाटने के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें पांचवीं पीढ़ी के कई आधुनिक फीचर्स हैं, लेकिन यह पूरी तरह से स्टील्थ (अदृश्य) नहीं है, इसलिए इसे 4.5 जेनरेशन में वर्गीकृत किया गया है।
दक्षिण कोरिया के इस फाइटर जेट प्रोग्राम का मुख्य लक्ष्य क्या है?
इस कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य उत्तर कोरिया से होने वाले हवाई खतरों का मुकाबला करने के लिए एक स्वदेशी और कम लागत वाला उच्च क्षमता वाला विमान तैयार करना है, जो भविष्य में निर्यात के लिए भी उपलब्ध हो सके।
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