CHINA- चीन दौरे पर पहुंचे राष्ट्रपति ट्रंप, अमेरिका-चीन वार्ता पर दुनिया की नजरें

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राष्ट्रपति ट्रंप
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बीजिंग। अमेरिकी राष्ट्रपति (Donald Trump) अपने दूसरे कार्यकाल की पहली आधिकारिक चीन यात्रा पर बीजिंग पहुंच रहे हैं। वर्ष 2017 के बाद यह उनका पहला चीन (China) दौरा है। ऐसे समय में हो रही इस शिखर वार्ता पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं, जब वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और पश्चिम एशिया का तनाव अंतरराष्ट्रीय चिंता का बड़ा कारण बना हुआ है।

शी जिनपिंग से होगी अहम मुलाकात

दो दिनों तक चलने वाले इस दौरे के दौरान ट्रंप की मुलाकात चीन के राष्ट्रपति (Xi Jinping) से होगी। इससे पहले दोनों नेताओं की मुलाकात अक्टूबर 2025 में दक्षिण कोरिया के बुसान में हुई थी, लेकिन बीजिंग की यह बैठक कहीं अधिक महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मुलाकात में वैश्विक सुरक्षा, व्यापार और रणनीतिक सहयोग जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी।

ईरान और होर्मुज संकट रहेगा केंद्र में

इस दौरे का सबसे संवेदनशील मुद्दा ईरान के साथ जारी सैन्य तनाव माना जा रहा है। अमेरिका चाहता है कि चीन अपने आर्थिक और कूटनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर ईरान को बातचीत के लिए तैयार करे। खास तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा सामान्य रूप से खोलने पर चर्चा होने की संभावना है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। मध्य पूर्व के तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें बढ़ी हैं, जिससे अमेरिका में पेट्रोल की कीमतों को लेकर ट्रंप प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है।

व्यापार और तकनीक पर भी होगी चर्चा

राष्ट्रपति ट्रंप के साथ एक उच्चस्तरीय व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भी चीन पहुंचा है। अमेरिका चाहता है कि चीन अमेरिकी कृषि उत्पादों, ऊर्जा संसाधनों और विशेष रूप से बोइंग विमानों की खरीद बढ़ाए। हालांकि ताइवान का मुद्दा अब भी दोनों देशों के बीच तनाव का प्रमुख कारण बना हुआ है। चीन चाहता है कि अमेरिका ताइवान को मिलने वाला सैन्य और कूटनीतिक समर्थन कम करे, जबकि अमेरिका क्षेत्र में यथास्थिति बनाए रखने की बात करता रहा है।

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एआई और वैश्विक सहयोग पर बनेगी रणनीति

दोनों देशों के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी उभरती तकनीकों से जुड़े जोखिम और सहयोग के मुद्दों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस यात्रा से कोई बड़ा ऐतिहासिक समझौता तुरंत सामने नहीं आएगा, लेकिन छोटे आर्थिक समझौते और लगातार संवाद की प्रक्रिया शुरू होना भी वैश्विक स्थिरता की दिशा में अहम कदम माना जाएगा।

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Anuj Kumar

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