जमीनी हमले के संकेत
वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प(Trump) ने ईरान के खिलाफ युद्ध को और अधिक आक्रामक बनाने के संकेत दिए हैं। आयरलैंड के प्रधानमंत्री के साथ ओवल ऑफिस(Oval Office) में हुई चर्चा के दौरान ट्रम्प ने स्पष्ट किया कि वे ईरान की धरती पर अमेरिकी सेना उतारने से नहीं डरते। उन्होंने ऐतिहासिक ‘वियतनाम युद्ध’ का जिक्र करते हुए कहा कि वे उस अनुभव(Experience) के दोहराव से भयभीत नहीं हैं। ट्रम्प का यह बयान उन अटकलों को बल देता है कि अमेरिका अब केवल हवाई हमलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि तेहरान में सीधे जमीनी दखल की तैयारी कर रहा है।
ऊर्जा ढांचे पर प्रहार और आंतरिक मतभेद
ट्रम्प ने दावा किया कि अमेरिका में ईरान की पूरी बिजली क्षमता और ऊर्जा ढांचे को महज एक घंटे के भीतर तबाह करने की ताकत है। हालांकि, उनके इस युद्धोन्मादी(Trump) रुख के कारण प्रशासन के भीतर दरारें दिखने लगी हैं। शीर्ष आतंकवाद-रोधी अधिकारी जो केंट ने युद्ध के विरोध में इस्तीफा दे दिया है, जिस पर ट्रम्प ने उन्हें ‘सुरक्षा के मामले में कमजोर’ करार दिया। वहीं, डेमोक्रेटिक सीनेटरों का मानना है कि प्रशासन अमेरिकी जनता को अंधेरे में रखकर एक लंबी और खतरनाक सैन्य तैनाती की ओर बढ़ रहा है।
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अमेरिकी जनता का कड़ा विरोध
भले ही राष्ट्रपति ट्रम्प युद्ध को जल्द खत्म करने की उम्मीद जता रहे हों, लेकिन अमेरिकी जनता का मूड इसके विपरीत है। हालिया सर्वेक्षणों(Trump) के अनुसार, 74% अमेरिकी नागरिक ईरान में जमीनी सेना भेजने के सख्त खिलाफ हैं। यहाँ तक कि 53% लोग इस पूरे युद्ध को ही गलत मान रहे हैं। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व के सफाए के बावजूद वहां का शासन तंत्र अब भी जवाबी हमले कर रहा है, जिससे अमेरिका एक ऐसे ‘अंतहीन युद्ध’ में फंस सकता है जिसकी भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है।
ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत अब तक ईरान को क्या नुकसान हुआ है?
28 फरवरी 2026 को शुरू हुए इस हमले में ईरान के कई सैन्य ठिकानों, मिसाइल साइटों और परमाणु सुविधाओं को निशाना बनाया गया। इन हवाई हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनी सहित कई उच्च पदस्थ अधिकारी मारे गए हैं।
अमेरिकी अधिकारी जो केंट ने इस्तीफा क्यों दिया और उस पर ट्रम्प की क्या प्रतिक्रिया थी?
जो केंट ने ईरान युद्ध की नीतियों से असहमत होने के कारण इस्तीफा दिया। राष्ट्रपति ट्रम्प ने उनके इस्तीफे को सही ठहराते हुए कहा कि केंट सुरक्षा के मामले में ‘कमजोर’ थे और उन्हें ईरान से कोई खतरा महसूस नहीं होता था, जो कि गलत था।
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