चीनी सोशल मीडिया पर उठी ताइवान पर कब्जे की मांग
बीजिंग: अमेरिकी सेना की एलीट ‘डेल्टा फोर्स’ ने एक नाटकीय ऑपरेशन में वेनेजुएला(Venezuela) के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को उनके बेडरूम से गिरफ्तार(Arrest) कर लिया। यह घटना तब हुई जब कुछ ही घंटों पहले मादुरो ने चीनी अधिकारियों के साथ मुलाकात की थी। चीन ने इस कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए अमेरिका पर ‘दुनिया का पुलिसवाला’ बनने का आरोप लगाया है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताते हुए कहा कि हर देश को अपने विकास का रास्ता चुनने का हक है। चीन के लिए यह एक बड़ा झटका है क्योंकि उसने पिछले 25 वर्षों में वेनेजुएला को लगभग 100 बिलियन डॉलर का कर्ज दिया है।
चीनी सोशल मीडिया पर ‘ताइवान मॉडल’ की चर्चा
भले ही चीनी सरकार इस घटना से नाराज है, लेकिन चीन के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इस अमेरिकी एक्शन की प्रशंसा हो रही है। चीनी यूजर्स सवाल कर रहे हैं कि यदि अमेरिका अपने प्रभाव वाले क्षेत्र(Venezuela) में घुसकर किसी नेता को पकड़ सकता है, तो चीन ताइवान पर सैन्य कब्जा क्यों नहीं कर सकता? कई लोग इसे ताइवान(Taiwan) के लिए एक ‘मॉडल’ के रूप में देख रहे हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का तर्क है कि वेनेजुएला और ताइवान की स्थिति अलग है—वेनेजुएला एक स्वतंत्र देश है जबकि चीन ताइवान को अपना आंतरिक हिस्सा मानता है।
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सैन्य संतुलन और भविष्य की चुनौतियां
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की इस त्वरित सैन्य सफलता से दुनिया में सैन्य विकल्पों के इस्तेमाल का एक नया चलन(Venezuela) शुरू हो सकता है। ताइवान के लिए सबक यह है कि उसे अपनी रक्षा क्षमताएं बढ़ानी होंगी। वहीं, चीन के लिए यह एक चेतावनी भी है क्योंकि वेनेजुएला में मौजूद चीनी हथियार प्रणालियाँ अमेरिकी हमले को रोकने में नाकाम रहीं। ताइवान को अमेरिका का मजबूत समर्थन प्राप्त है, जिससे ताइवान स्ट्रेट में सैन्य संतुलन बना हुआ है। ऐसे में चीन कोई भी कदम उठाने से पहले अमेरिकी सैन्य शक्ति और अपनी रणनीतिक सीमाओं पर गहराई से विचार करेगा।
वेनेजुएला और चीन के बीच संबंधों का मुख्य आधार क्या है?
चीन और वेनेजुएला(Venezuela) के बीच दशकों पुराने करीबी रिश्ते हैं, जिसका आधार अमेरिका विरोधी विचारधारा और तेल व्यापार है। वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है और चीन ने वहां बिजली, सड़क और गैस जैसी बुनियादी परियोजनाओं में अरबों डॉलर का निवेश कर रखा है।
ताइवान के विशेषज्ञों का अमेरिकी कार्रवाई पर क्या कहना है?
ताइवान के विशेषज्ञों और राजनेताओं का मानना है कि चीन द्वारा अमेरिका की नकल करना आसान नहीं है। उनका कहना है कि “चीन अमेरिका नहीं है और ताइवान वेनेजुएला नहीं है।” ताइवान की अपनी मजबूत रक्षा प्रणाली है और उसे अमेरिका का सीधा समर्थन प्राप्त है, जो चीन के लिए एक बड़ी बाधा है।
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