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Kedarnath Yatra: एक्वाइन इन्फ्लूएंजा के चलते यूपी के घोड़ा-खच्चरों पर निषेध

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उत्तराखंड पशुपालन विभाग: केदारनाथ यात्रा मार्ग पर एक्वाइन इन्फ्लूएंजा वायरस के संकट को देखते हुए उत्तर प्रदेश से आने वाले सभी घोड़ा-खच्चरों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। उत्तराखंड गवर्नमेंट और पशुपालन विभाग ने यह निर्णय संक्रमण की रोकथाम के लिए लिया है।

पशुपालन विभाग के सचिव डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम (Dr. BVRC Purushottam) ने स्पष्ट किया कि संक्रमित या बलहीन पशु अब सफर मार्ग पर नहीं चल सकेंगे। उत्तर प्रदेश से हर वर्ष 2000 से 3000 घोड़ा-खच्चर यात्रा मार्ग में आते हैं, लेकिन इस साल संक्रमण की चिंता के चलते इन पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

संक्रमण की पुष्टि और प्रारंभिक रिपोर्ट

रुद्रप्रयाग जिले में 26 मार्च को हुई सैंपलिंग में एक्वाइन इन्फ्लूएंजा वायरस के प्रारंभिक लक्षण पाए गए थे। इसके बाद 16,000 से अधिक घोड़ा-खच्चरों की पड़ताल की गई, जिनमें 152 सैंपल प्रारंभिक स्तर पर पॉजिटिव पाए गए। हालांकि RT-PCR प्रतिवेदन में सभी निगेटिव निकले, लेकिन एहतियात के तौर पर गवर्नमेंट ने सख्त कदम उठाए हैं।

600 पशुओं के लिए विशेष क्वारंटीन सेंटर

गवर्नमेंट ने यात्रा मार्ग पर 600 घोड़ा-खच्चरों के लिए विशेष क्वारंटीन सेंटर उद्यत किए हैं। हर पशु का स्वास्थ्य परीक्षण अनिवार्य किया गया है। किसी भी प्रकार की बीमारी पाए जाने पर पशु को फौरन अलग कर दिया जा रहा है। सफर के अलग-अलग पड़ावों पर भी क्वारंटीन सुविधाएं मुहैया कराई गई हैं।

उत्तराखंड पशुपालन विभाग

उत्तराखंड पशुपालन विभाग: विशेषज्ञों की टीम तैनात

पशुपालन विभाग ने यात्रा मार्ग पर 22 अनुभवी पशु चिकित्सकों की टीम तैनात की है। साथ ही राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान संस्थान और पंतनगर विश्वविद्यालय से विशेषज्ञों की मौजूदगी सुनिश्चित की गई है। सिर्फ़ दो दिनों में 13 घोड़ा-खच्चरों की देहांत की समाचार है, जिनमें से अधिकतर मृत्यु डायरिया और एक्यूट कोलिक से हुई हैं।

स्थानीय लोगों की मांग और गवर्नमेंट भरोसा

स्थानीय लोगों ने मांग की है कि रोक को और बढ़ाया जाए ताकि संक्रमण से यात्रा पर कोई प्रभाव न पड़े। गवर्नमेंट ने भी आश्वासन दिया है कि वह स्थिति पर लगातार नजर रख रही है और आवश्यकता के मुताबिक और कदम उठाए जाएंगे।

संक्रमण मानव में नहीं फैलता, लेकिन संकट कायम

हालांकि एक्वाइन इन्फ्लूएंजा वायरस जानवरों से इंसानों में नहीं फैलता, लेकिन पशुओं में इसकी संक्रामकता ज़्यादा होती है। इसीलिए गवर्नमेंट ने एहतियातन यह रोक लागू की है ताकि सफर कुशल और सुरक्षित बनी रहे।

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