Barefoot walking: आजकल माता-पिता की अत्यधिक सावधानी कभी-कभी बच्चों के स्वास्थ्य पर अस्वीकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। खासकर, बच्चों को फर्श पर या सैंडल पहनकर चलने की बजाय नंगे पैर हरी घास पर चलने से रोकना कुछ स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन रहा है। विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि बच्चों को नंगे पैर चलने देना उनके शारीरिक और मानसिक आरोग्य के लिए बेहद लाभ है। आइए विस्तार से जानते हैं कि यह आदत बच्चों को कैसे लाभ पहुंचाती है।
आँखों के स्वास्थ्य में सुधार
आजकल कम उम्र में बच्चों को चश्मा लगना आम बात हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि गैजेट्स का अत्यधिक उपयोग और खराब पोषण इसका मुख्य कारण हैं। बच्चों के नेत्र स्वास्थ्य के लिए, उन्हें चलना आरंभ करते ही नंगे पैर चलने देना बहुत अच्छा माना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि पैरों में कई दबाव बिंदु (pressing points) होते हैं, और जब बच्चे नंगे पैर चलते हैं, तो इन बिंदुओं पर दबाव पड़ता है। इससे आँखों में रक्त संचार (blood flow) बेहतर होता है और आँखों का आरोग्य सुधरता है।

इसके अतिरिक्त, हरी घास को देखने से आँखों की मांसपेशियों को आराम मिलता है, जिससे आँखों पर पड़ने वाला तनाव कम होता है। इस आदत को जारी रखने से भविष्य में आँखों की समस्याओं से बचा जा सकता है। अध्ययनों से यह भी पता चला है कि इस प्रकार की सैर का रक्तचाप (blood pressure), हृदय गति (heart rate), त्वचा और मांसपेशियों के तनाव पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
मस्तिष्क की चपलता और याददाश्त में सुधार
कुछ अध्ययनों के अनुसार, यह देखा गया है कि जो बच्चे कम उम्र से नंगे पैर चलते हैं, उनका मस्तिष्क उन बच्चों की तुलना में अधिक सक्रिय होता है जो सदा सैंडल या जूते पहनकर चलते हैं। नंगे पैर चलने से बच्चों के पैरों के तलवों की नसें सीधे जमीन के संपर्क में आती हैं, जिससे मस्तिष्क को अधिक संवेदी जानकारी (sensory information) मिलती है। यह संवेदी इनपुट मस्तिष्क के विकास को बढ़ावा देता है, जिससे बच्चों की चपलता (agility) और याददाश्त (memory) में उल्लेखनीय सुधार होता है। यह आदत बच्चों को उनके चारों ओर के वातावरण से बेहतर ढंग से जुड़ने में भी मदद करती है, जो उनके समग्र संज्ञानात्मक विकास (cognitive development) के लिए महत्वपूर्ण है।