ANI और यूट्यूब इनफ्लुएंसर्स के बीच कॉपीराइट विवाद…

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mohak mangal
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नई दिल्ली, 31 मई 2025: समाचार एजेंसी एशियन न्यूज इंटरनेशनल (ANI) और यूट्यूब इनफ्लुएंसर्स के बीच कॉपीराइट स्ट्राइक को लेकर विवाद ने डिजिटल क्रिएटर्स और मीडिया हाउसेज के बीच तनाव को उजागर कर दिया है। लोकप्रिय यूट्यूबर्स जैसे मोहक मंगल, रजत पवार और थगेश ने ANI पर आरोप लगाया है कि वह उनके वीडियो में 8-10 सेकंड के न्यूज फुटेज के इस्तेमाल पर कॉपीराइट स्ट्राइक भेज रही है और लाखों रुपये का जुर्माना मांग रही है।


मोहक मंगल ने अपने एक हालिया वीडियो में दावा किया कि ANI ने उनके चैनल पर कॉपीराइट स्ट्राइक लगाकर 45 लाख रुपये की मांग की, जबकि रजत पवार से 18 लाख रुपये (प्लस GST) मांगे गए। यूट्यूबर्स का कहना है कि उनके वीडियो में ANI के फुटेज का इस्तेमाल “फेयर यूज” नीति के तहत किया गया था, जो समाचार, शिक्षा, या आलोचना के लिए सीमित कॉपीराइट सामग्री के उपयोग की अनुमति देता है।

ANI का जवाबी हमला

ANI ने इन आरोपों को खारिज करते हुए मोहक मंगल, हास्य कलाकार कुणाल कामरा, और Alt News के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में मानहानि का मुकदमा दायर किया है। ANI का दावा है कि इन लोगों ने सोशल मीडिया पर एजेंसी को बदनाम करने के लिए “ब्लैकमेलिंग” और “उगाही” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। ANI के प्रवक्ता ने कहा, “हम अपने कॉपीराइट सामग्री की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं। यूट्यूबर्स द्वारा बिना अनुमति के हमारे फुटेज का उपयोग अनुचित है।”

PTI का कदम और सोशल मीडिया पर बहस

इस बीच, प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (PTI) ने यूट्यूबर्स को किफायती दरों पर अपने वीडियो कंटेंट का उपयोग करने की पेशकश की है, जिसे कई क्रिएटर्स ने सकारात्मक कदम बताया है। सोशल मीडिया, खासकर एक्स प्लेटफॉर्म, पर यह विवाद चर्चा का केंद्र बना हुआ है। कुछ यूजर्स ANI की कार्रवाइयों को “हफ्ता वसूली” करार दे रहे हैं, जबकि अन्य का मानना है कि कॉपीराइट उल्लंघन पर सख्ती जरूरी है।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

डिजिटल कॉपीराइट विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला भारत में “फेयर यूज” नीति की अस्पष्टता को उजागर करता है। कॉपीराइट कानून विशेषज्ञ रीमा शर्मा ने कहा, “भारत में फेयर यूज की परिभाषा स्पष्ट नहीं है, जिसके कारण क्रिएटर्स और कॉपीराइट धारकों के बीच विवाद बढ़ रहे हैं। इस मामले से डिजिटल कंटेंट क्रिएशन के नियमों पर नई बहस छिड़ सकती है।”

आगे क्या?

यह विवाद न केवल यूट्यूबर्स और समाचार एजेंसियों के बीच तनाव को दर्शाता है, बल्कि डिजिटल युग में कॉपीराइट कानूनों की प्रासंगिकता पर भी सवाल उठाता है। दिल्ली हाईकोर्ट में चल रहे मुकदमे और सोशल मीडिया पर चल रही बहस से इस मामले में और गर्माहट आने की उम्मीद है। इस बीच, यूट्यूब क्रिएटर्स और दर्शक इस मामले पर नजर बनाए हुए हैं कि यह डिजिटल कंटेंट क्रिएशन के भविष्य को कैसे प्रभावित करेगा।

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