10वीं में लेकर आई 95.67 प्रतिशत अंक, IAS बनने का सपना
कभी हालात के आगे झुकने के बजाय उनसे लड़ना ही असली हिम्मत होती है। कृष्णा की कहानी इसी साहस और दृढ़ संकल्प की मिसाल है।
बचपन में पिता का साया छिना
- कृष्णा ने बहुत कम उम्र में अपने पिता को खो दिया।
- पिता के निधन के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
- बचपन से ही उन्हें कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा।
कोरोना काल में मां का निधन
- कोरोना महामारी के दौरान उनकी मां का भी निधन हो गया।
- यह उनके जीवन का सबसे कठिन दौर था।
- एक ही झटके में कृष्णा पूरी तरह से अनाथ हो गईं।
10 महीने की उम्र में पिता को खो दिया। कोरोना (Corona) के समय मां का भी देहांत हो गया। मामा के घर रहकर पढ़ाई की और अब 10वीं बोर्ड परीक्षा में 95.67 प्रतिशत अंक हासिल किए।
टोंक के निवाई की कृष्णा और उसके मामा का संघर्ष क्षेत्र के स्टूडेंट्स और पेरेंट्स के लिए प्रेरणा बनकर सामने आया है। कृष्णा का अब (IAS) बनने का सपना है।
माता-पिता का हुआ निधन, मामा ने दिया साथ
छात्रा कृष्णा ने बताया-जब वह 10 महीने की थी, तब गोवर्धनपुरा निवासी मेरे पिता बाबूलाल मीणा का निधन हो गया। मेरे दादा-दादी का भी पहले ही देहांत हो चुका था। इस कारण मेरे मामा राजेश मीणा मेरी मां राजंती देवी, मुझे और मेरे भाई राजीव को अपने घर यशोदानंदपुरा थूणी ले आए। साल 2020 में कोरोना के समय मां का भी निधन हो गया।
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मामा राजेश मीणा हॉस्टल वॉर्डन है। उन्होंने संघर्ष करते हुए अपनी दो बेटियों, एक बेटे के साथ हम दोनों भाई-बहनों को पढ़ाया। मेरा भाई राजीव इस साल 12वीं कक्षा में पहुंच गया है।
सिविल सर्विस की तैयारी करेंगी कृष्णा
कृष्णा ने बताया की उसने 10वीं की पढ़ाई निवाई के करेड़ा बुजुर्ग के महर्षि सेवानंद स्कूल से की। स्कूल के बाद घर पर रोजाना 4 घंटे पढ़ाई की। मामा राजेश मीणा और मामी ने पढ़ाई में पूरा सहयोग दिया। कृष्णा ने बताया कि वह IAS बनना चाहती है।
भांजी कृष्णा की सफलता पर मामा राजेश ने कहा-आज मेरी भांजी ने मेरा सीना गर्व से चौड़ा कर दिया है। कृष्णा IAS बनना चाहती है। उसकी पढ़ाई में कोई कमी नहीं रहे इसके लिए वे पूरी मेहनत करेंगे।
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