नई दिल्ली । अगर पेट स्वस्थ और साफ रहे, तो शरीर की आधी बीमारियां खुद-ब-खुद दूर हो जाती हैं। लेकिन भागदौड़ भरी जिंदगी और अनियमित दिनचर्या (Irregular routine) के कारण अपच, गैस, एसिडिटी और कब्ज जैसी समस्याएं आम हो गई हैं। योग विज्ञान के अनुसार, इन समस्याओं से प्रभावी रूप से निपटने में गोरक्षासन बेहद लाभकारी है।
योग विशेषज्ञों की राय
मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योगा (National Institute of Yoga) के अनुसार, गोरक्षासन पेट की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाकर संपूर्ण स्वास्थ्य को मजबूत करता है। योग विशेषज्ञ बताते हैं कि यह नाथ योगियों की प्राचीन परंपरा का मूल आसन है और इसे एक उन्नत योग मुद्रा माना जाता है।
शरीर और मन को करता है संतुलित
योग विशेषज्ञों के मुताबिक, गोरक्षासन शरीर, मन और प्राण को संतुलित कर जीवन ऊर्जा को जागृत करता है। इसके नियमित अभ्यास से कुंडलिनी जागरण, एकाग्रता में वृद्धि, मानसिक स्थिरता और मेरुदंड की लचक बढ़ती है।
पाचन तंत्र के लिए विशेष लाभकारी
गोरक्षासन विशेष रूप से कमजोर पाचन, पेट फूलने, कब्ज और एसिडिटी से परेशान लोगों के लिए बेहद उपयोगी माना गया है। ध्यान और स्थिर बैठने में कठिनाई झेल रहे लोगों के लिए भी यह आसन लाभदायक है।
गोरक्षासन करने की विधि
गोरक्षासन (Gorakshasana) करने के लिए जमीन पर बैठकर दोनों पैरों को सामने फैलाएं। फिर पैरों को मोड़कर दोनों तलवों को आपस में मिलाएं और एड़ियों को धीरे-धीरे नितंबों की ओर खींचें। एड़ियों पर बैठते हुए घुटनों को जमीन से सटाएं।
सही मुद्रा और अभ्यास का समय
दोनों हाथों को ज्ञान मुद्रा में घुटनों पर रखें। रीढ़, गर्दन और सिर को सीधा रखते हुए सामान्य श्वास लेते रहें। शुरुआत में 1–2 मिनट तक अभ्यास करें और धीरे-धीरे समय बढ़ाएं।
नियमित अभ्यास से मिलने वाले फायदे
एक्सपर्ट्स के अनुसार, नियमित अभ्यास से पाचन तंत्र मजबूत होता है, प्रोस्टेट ग्रंथि की कार्यक्षमता बढ़ती है, कमर और पैरों के दर्द में राहत मिलती है और ध्यान की क्षमता विकसित होती है।
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