नई दिल्ली । गलत खान-पान, पर्याप्त पानी न पीना और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण आज कम उम्र के लोगों में भी पथरी की समस्या बढ़ रही है। किडनी (Kidney) में पथरी होने पर शरीर की गंदगी बाहर नहीं निकल पाती, जिससे तेज दर्द, जलन और कभी-कभी संक्रमण जैसी परेशानियां होती हैं।
जीवनशैली सुधार से पथरी से बचाव संभव
आमतौर पर लोग दवाइयों या ऑपरेशन (Operation) का सहारा लेते हैं, लेकिन अगर समय रहते जीवनशैली सुधार ली जाए, तो पथरी की समस्या काफी हद तक कम की जा सकती है। इस दिशा में योग एक प्राकृतिक और सरल उपाय साबित होता है।
सर्पासन: पथरी रोकने में मददगार योगासन
सर्पासन, जिसे भुजंगासन या कोबरा पोज़ भी कहा जाता है, पेट और कमर (Stomache and Wrist) के आसपास के अंगों पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। इसमें पेट के बल लेटकर शरीर को ऊपर उठाया जाता है, जिससे पेट, कमर और रीढ़ की हड्डी पर हल्का दबाव पड़ता है।
किडनी की मांसपेशियां होती हैं सक्रिय
यह दबाव किडनी की मांसपेशियों को सक्रिय करता है और वहां जमा विषैले तत्व धीरे-धीरे बाहर निकलते हैं। नियमित अभ्यास से छोटी पथरी टूटकर पेशाब के रास्ते बाहर निकलने में मदद मिल सकती है।
रीढ़ की हड्डी और पाचन तंत्र को भी लाभ
सर्पासन रीढ़ की हड्डी को मजबूत करने में भी सहायक है। पीठ और कमर की मांसपेशियां खिंचती हैं, लचीलापन बढ़ता है और रीढ़ मजबूत होती है। साथ ही यह पाचन तंत्र को सक्रिय करता है, जिससे पेट साफ रहता है और शरीर में गंदगी जमा नहीं होती।
मानसिक स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक असर
सर्पासन का मानसिक स्वास्थ्य पर भी लाभ होता है। गहरी सांस लेने से दिमाग तक अधिक ऑक्सीजन पहुंचती है, मन शांत होता है और तनाव कम होता है।
चेहरे पर चमक और शरीर में ताजगी
सर्पासन का असर त्वचा और चेहरे पर भी देखा जा सकता है। बेहतर रक्त संचार से चेहरे पर प्राकृतिक चमक आती है और शरीर में ताजगी महसूस होती है।
सर्पासन कैसे करें?
सर्पासन करना आसान है। पेट के बल लेटकर हथेलियों को छाती के पास रखें, धीरे-धीरे सांस लेते हुए शरीर को ऊपर उठाएं, सिर को पीछे की ओर ले जाकर ऊपर देखें और कुछ समय इसी स्थिति में रहें। फिर आराम से लौट आएं।
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डिजिटल लाइफस्टाइल से बढ़ी सेहत की चुनौतियां
डिजिटल लाइफस्टाइल, मोबाइल और लैपटॉप पर लंबे समय तक काम करना और कुर्सी पर बैठने की आदत ने हमारी सेहत पर गंभीर असर डाला है। लंबे समय तक निष्क्रिय रहने से शरीर के अंदरूनी अंग ठीक तरह से काम नहीं करते, मांसपेशियां कमजोर होती हैं और कई बीमारियां जन्म ले लेती हैं।
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