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National- भारत के 138 शहर दुनिया के प्रदूषित और समृद्ध शहरों की सूची में

Author Icon By Anuj Kumar
Updated: May 19, 2026 • 11:16 AM
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मुख्य बातें: 

नई दिल्ली। तेजी से हो रहे शहरी विकास और आर्थिक विस्तार के बीच भारत के शहरों में प्रदूषण (Pollution) की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। हालिया वैश्विक अध्ययन में खुलासा हुआ है कि दुनिया के सबसे अधिक प्रदूषित और समृद्ध माने गए 390 शहरों में भारत के 138 शहर शामिल हैं। यह कुल संख्या का करीब 35.4 प्रतिशत हिस्सा है, जो देश के विकास और पर्यावरणीय चुनौतियों की दोहरी तस्वीर पेश करता है।

5,435 शहरों पर किया गया अध्ययन

शोधकर्ताओं ने वर्ष 2019 से 2024 के बीच दुनिया के 5,435 शहरों का अध्ययन किया। इसके लिए उपग्रह आधारित नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (Nitrogen Dioxide) डेटा और सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के अनुमानों का उपयोग किया गया। अध्ययन में पाया गया कि भारत में शहरी विकास अभी भी बड़े पैमाने पर जीवाश्म ईंधन आधारित परिवहन, उद्योग और बिजली उत्पादन पर निर्भर है। यही वजह है कि आर्थिक गतिविधियों में तेजी के साथ प्रदूषण का स्तर भी बढ़ता जा रहा है।

महानगरों में दिखे सुधार के संकेत

रिपोर्ट के मुताबिक Delhi, Mumbai और Kolkata जैसे बड़े शहरों में स्वच्छ विकास को लेकर कुछ सकारात्मक प्रयास जरूर देखने को मिले हैं। हालांकि अधिकांश भारतीय शहर अभी भी प्रदूषण नियंत्रण के मोर्चे पर अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर पाए हैं। इसके विपरीत चीन और कई अन्य देशों ने स्वच्छ ऊर्जा और टिकाऊ शहरीकरण के जरिए प्रदूषण कम करने में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है।

आर्थिक रूप से मजबूत हो रहे भारतीय शहर

आर्थिक दृष्टि से Mumbai देश का सबसे समृद्ध शहर बना हुआ है। ‘हुरुन इंडिया रिच लिस्ट 2025’ के अनुसार, मुंबई में 91 अरबपति रहते हैं। वहीं Delhi-एनसीआर करीब 26.33 लाख करोड़ रुपये की जीडीपी के साथ दूसरे स्थान पर है। Bengaluru देश की तकनीकी राजधानी के रूप में तेजी से उभरा है, जिसकी अर्थव्यवस्था करीब 9.86 लाख करोड़ रुपये की बताई गई है। वहीं Chennai ऑटोमोबाइल, आईटी और हेल्थकेयर सेक्टर में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

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स्वच्छ ऊर्जा अपनाने की जरूरत

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को आर्थिक विकास के साथ-साथ स्वच्छ ऊर्जा, सार्वजनिक परिवहन और हरित तकनीकों को तेजी से अपनाने की जरूरत है। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में शहरी प्रदूषण और गंभीर चुनौती बन सकता है।

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