MP : 28 साल की महिला रोज खा रही 70 रोटियां, फिर भी नहीं मिटती भूख

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Manju Saundhiya
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मंजू सौंधिया (Manju Saundhiya) के घरवालों का कहना है कि दूसरी तरह की दवाएं लेने पर उन्हें लूज मोशन की समस्या होती है। इसलिए वो दवाएं नहीं ले पा रहीं। फिलहाल मंजू के परिवार वालों को सलाह दी गई है कि उनकी रोटी की आदत छुड़ाई जाए

मध्य प्रदेश के राजगढ़ (Rajgarh) जिले में एक महिला अजीब तरह की समस्या से जूझ रही है। वो दिनभर में 60 से 70 रोटियां खाती है। लेकिन इसके बावजूद कमजोरी महसूस करती रहती है। परिवार गरीब है, ऐसे में उनके सामने आर्थिक तंगी की भी समस्या आ रही है. डॉक्टर्स भी अभी तक उसकी इस समस्या का सही इलाज ढूंढ नहीं पाए हैं।

सुठालिया तहसील के नेवज गांव की रहने वाली 28 साल की मंजू सौंधिया

सुठालिया तहसील के नेवज गांव की रहने वाली 28 साल की मंजू सौंधिया Manju Saundhiya एक हाउसमेकर हैं। उनके दो बच्चे हैं। तीन साल पहले तक वो बिल्कुल स्वस्थ थीं, लेकिन फिर उन्हें ये समस्या आने लगी. मंजू सौंधिया की दिनचर्या में ऐसी तब्दीली आई कि वो हर कुछ मिनट में रोटी खाती और पानी पीती रहती हैं।

बाद में मंजू सौंधिया को स्थानीय डॉक्टर्स को दिखाया गया. लेकिन फिर भी कोई हल न निकला। डॉ. कोमल दांगी ने आजतक को बताया कि छह महीने पहले मंजू उनके पास गई थीं. उन्हें घबराहट थी, ऐसे में भर्ती कर इलाज किया गया। कमजोरी की शिकायत के बाद उन्हें मल्टीविटामिन दवाएं दी गईं।

डॉ. कोमल दांगी का मानना है कि मंजू सौंधिया को साइकियाट्रिक डिसऑर्डर है

डॉ. कोमल दांगी का मानना है कि मंजू सौंधिया को साइकियाट्रिक डिसऑर्डर है. इसलिए उन्हें लगता है कि उन्होंने खाना नहीं खाया। मन को शांत करने के लिए वो बार-बार रोटी खाती हैं और पानी पीती हैं. डॉ. कोमल दांगी ने मंजू को भोपाल के मनोचिकित्सक आरएन साहू के पास जाने की सलाह दी थी।

लेकिन जब मनोचिकित्सक ने मंजू को देखा, तो उनका कहना था कि उन्हें कोई मानसिक बीमारी नहीं है। मंजू सौंधिया के घरवालों का कहना है कि दूसरी तरह की दवाएं लेने पर उन्हें लूज मोशन की समस्या होती है. इसलिए वो दवाएं नहीं ले पा रहीं। फिलहाल मंजू के परिवार वालों को सलाह दी गई है कि उनकी रोटी की आदत छुड़ाई जाए. इसके लिए उन्हें खिचड़ी, फल या अन्य खाद्य पदार्थ दिए जाएं. ताकि उनके मानसिक आदत को सुधारा जा सके।

मंजू के भाई चंदरसिंह सौंधिया का कहना है कि मंजू की शादी सिंगापुरा के राधेश्याम सौंधिया से हुई थी। वो अब मायके और ससुराल आती-जाती रहती हैं। बच्चे ससुराल में ही रहते हैं। परिवार वालों ने भी बताया कि इलाज के दौरान उनकी आर्थिक स्थिति भी खराब हो गई है. अब वे सरकारी मदद की उम्मीद कर रहे हैं।

राजगढ़ का असली नाम क्या है?

झंझेरपुर जो कि राजधानी थी और इसमें एक महल था जिसके कारण यह स्थान राजगढ़ के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

राजगढ़ जिले की कुल जनसंख्या कितनी है?

स्रोत: 2011 की जनगणना के अनुसार राजगढ़ जिले कीजनसंख्या 1,545,814 है, जो कि एस्वातिनी या मॉरीशस जैसे देशों से भी अधिक है यह इसे भारत में 322वें स्थान पर रखता है (कुल 640 में से)। जिले का जनसंख्या घनत्व 251 निवासी प्रति वर्ग किलोमीटर (650/वर्ग मील) है।

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Surekha Bhosle

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Surekha Bhosle

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