लिवर जोधपुर में सफल ट्रांसप्लांट, किडनी को एयरप्लेन से दिल्ली ले जाया गया
मौत भी जब जिंदगी की राह बन जाए, तो वह मिसाल बन जाती है। (Balotra) बालोतरा जिले के गिड़ा तहसील के 5 साल के मासूम भोमाराम ने ब्रेन डेड होने के बाद भी दो लोगों को नया जीवन दे दिया। जोधपुर एम्स में परिजनों के साहसिक और मानवीय फैसले से उसके लिवर और किडनी डोनेट किए गए।
ग्रीन कॉरिडोर बनाकर लिवर को दिल्ली के लिए जोधपुर एयरपोर्ट तक पहुंचाया गया, जबकि किडनी का जोधपुर में सफल ट्रांसप्लांट किया गया।
14 दिसंबर को बिगड़ी तबीयत, एम्स में कराया गया था भर्ती
भोमाराम पुत्र भैराराम की 14 दिसंबर को अचानक तबीयत बिगड़ गई थी। परिजन उसे गिड़ा अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां से हालत गंभीर होने पर जोधपुर एम्स रेफर किया गया। इलाज के दौरान बच्चे की स्थिति लगातार नाजुक बनी रही और डॉक्टरों ने उसे (Brain dead) ब्रेन डेड घोषित कर दिया।
डॉक्टरों की सलाह पर परिजनों ने लिया बड़ा निर्णय
एम्स के डॉक्टरों ने ब्रेन डेड होने की जानकारी परिजनों को दी और ऑर्गन डोनेशन को लेकर बातचीत की। पिता भैराराम और पूरे परिवार ने गहन विचार-विमर्श के बाद मानवीय निर्णय लेते हुए अंगदान की सहमति दी। इस फैसले से दो गंभीर मरीजों को नया जीवन मिल सका।
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दादा ने बताया – परिवार को है बेटे पर गर्व
मासूम के दादा किशनाराम सेन ने बताया कि डॉक्टरों की सलाह के बाद परिवार ने यह फैसला लिया। सोमवार को ऑर्गन डोनेशन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद एम्स प्रशासन ने भोमाराम का शव परिजनों को सौंप दिया, जिसे अंतिम संस्कार के लिए गांव गिड़ा ले जाया जा रहा है।
एम्स डॉक्टर बोले – लिवर दिल्ली, किडनी जोधपुर में ट्रांसप्लांट
एम्स के डॉक्टरों के अनुसार, भोमाराम का लिवर दिल्ली के एक अस्पताल में ट्रांसप्लांट के लिए भेजा गया है, जबकि किडनी का सफल ट्रांसप्लांट जोधपुर में ही किया गया।
क्या ब्रेन डेड व्यक्ति ठीक हो सकता है?
ब्रेन डेड मरीज़ ठीक नहीं हो पाएगा। शरीर यांत्रिक सहारे के साथ साँस लेना जारी रख सकता है, लेकिन अंततः, लगातार सहारे के बावजूद भी साँस और हृदय दोनों रुक जाएँगे।
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