नई दिल्ली । भारतीय जनता पार्टी को जल्द ही नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिलने वाला है। बिहार के वरिष्ठ नेता और वर्तमान राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन (Nitin Nabin) 19 जनवरी को अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल करेंगे और 20 जनवरी को उनके निर्विरोध पूर्णकालिक राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने की संभावना है। यह चुनाव औपचारिक माना जा रहा है, क्योंकि उनके मुकाबले कोई अन्य उम्मीदवार मैदान में नहीं होगा।
शीर्ष नेतृत्व रहेगा मौजूद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) और मौजूदा अध्यक्ष जेपी नड्डा उनके प्रस्तावक बनने वाले हैं। इस अवसर पर सभी भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष और राष्ट्रीय पदाधिकारी दिल्ली में मौजूद रहेंगे।
भाजपा के सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष
45 वर्षीय नितिन नबीन भाजपा के इतिहास में सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने जा रहे हैं। उनका कार्यकाल जनवरी 2026 से जनवरी 2029 तक रहेगा। यह बदलाव पार्टी में पीढ़ीगत परिवर्तन और युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाने की प्रधानमंत्री मोदी की रणनीति को दर्शाता है।
बूथ स्तर पर संगठन मजबूत करने पर जोर
दिसंबर 2025 में कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद से ही नबीन संगठन को बूथ स्तर पर मजबूत करने पर जोर देते रहे हैं, लेकिन पूर्णकालिक अध्यक्ष बनते ही उनके सामने कई बड़ी और जटिल चुनौतियां खड़ी होंगी।
2026 के विधानसभा चुनाव पहली बड़ी परीक्षा
दरअसल, 2026 में पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल (Kerala) और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव होने हैं।
असम में सत्ता बरकरार रखना और पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी से मुकाबला करना आसान नहीं होगा। वहीं दक्षिण भारत में भाजपा की सीमित पकड़ को मजबूत करना नबीन के लिए बड़ी राजनीतिक चुनौती होगी।
महिला आरक्षण से बदलेगा टिकट समीकरण
नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत 33 प्रतिशत महिला आरक्षण 2027 की जनगणना और परिसीमन के बाद लागू होगा। इससे टिकट वितरण और क्षेत्रीय संतुलन को लेकर नए विवाद खड़े हो सकते हैं।
योग्य महिला नेतृत्व तैयार करना नबीन के लिए सबसे अहम जिम्मेदारी होगी।
‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ की चुनौती
नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के सामने तीसरी बड़ी चुनौती एक राष्ट्र, एक चुनाव की होगी।
यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो चुनावी रणनीति, संसाधन प्रबंधन, प्रचार और गठबंधन की पूरी संरचना नए सिरे से तैयार करनी होगी।
जाति जनगणना और सामाजिक संतुलन
चौथी चुनौती जाति जनगणना और उससे बनने वाले नए सामाजिक समीकरण होंगे।
ओबीसी, दलित और आदिवासी राजनीति में बदलाव के बीच पार्टी के पारंपरिक वोट बैंक को संभालना नितिन नबीन के लिए कठिन होगा।
गैर-राजनीतिक युवाओं को जोड़ने की जिम्मेदारी
पांचवीं बड़ी चुनौती गैर-राजनीतिक युवाओं को संगठन से जोड़ने की है।
प्रधानमंत्री मोदी के लक्ष्य के अनुसार एक लाख गैर-राजनीतिक परिवारों से युवाओं को राजनीति में लाना होगा, जिससे संगठनात्मक ढांचे में बड़े बदलाव आएंगे।
असंतोष और गुटबाजी संभालना भी जरूरी
इसके अलावा अध्यक्ष पद की दौड़ में कई वरिष्ठ नेता शामिल थे। ऐसे में संभावित असंतोष और गुटबाजी को संभालते हुए युवाओं और वरिष्ठ नेताओं के बीच संतुलन बनाना नबीन की सबसे कठिन परीक्षा होगी।
Read More : 70 साल की हुई मायावती, बोलीं–ब्राह्मणों को किसी का चोखा-बाटी नहीं चाहिए
2029 लोकसभा चुनाव की नींव
कुल मिलाकर, नितिन नबीन का कार्यकाल संगठनात्मक मजबूती के साथ-साथ 2029 लोकसभा चुनाव की नींव रखने वाला साबित हो सकता है, लेकिन यह रास्ता चुनौतियों से भरा होगा।
Read More :