सही तरीके से दाल खाने के फायदे

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दाल खाने
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दाल हिन्दुस्तानी भोजन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसे प्रोटीन, फाइबर और अन्य आवश्यक सहायक अवयव का अच्छा स्रोत माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि 90% लोग गलत विधि से दाल का सेवन करते हैं, जिससे उन्हें इसके पूरे फायदा नहीं मिल पाते? योग गुरु डॉ. हंसाजी योगेंद्र के अनुसार, गलत विधि से दाल बनाने और खाने से गैस, अम्लता और गैस जैसी समस्याएं हो सकती हैं। खासकर जब दाल को बिना भिगोए पकाया जाता है, तो उसमें मौजूद फाइटिक एसिड शरीर में पोषक संघटक के आत्मसात को बाधित कर सकता है और पाचन से जुड़ी परेशानियां बढ़ा सकता है।

दाल पकाने में आम भूल

बहुत से लोग दाल को धोने के बाद सीधा कुकर में डालकर बना लेते हैं, लेकिन यह विधि गलत है। दाल में मौजूद पोषक तत्व अवरोधक को हटाने के लिए इसे भिगोकर बनाना जरूरी है। खासकर छोले और राजमा जैसी सख्त दालों को 8-10 घंटे तक भिगोकर रखना चाहिए, जबकि तूर और मसूर जैसी हल्की दालों को 1-4 घंटे तक भिगोना उपयोगी होता है। भिगोने के बाद दाल का पानी फेंककर ताजे पानी में पकाना चाहिए, ताकि उसमें वर्तमान गैस बनाने वाले असलियत कम हो जाएं और दाल आसानी से पच सके।

दाल खाने का सही विधि

यदि आप दाल से अधिकतम पोषण चाहते हैं, तो इसे सही विधि से पकाने के अलावा सही विधि से खाना भी जरूरी है। भोजन के साथ हरी सब्जियां, दही और घी शामिल करना पचाव को श्रेष्ठ बनाता है। साथ ही, रात के समय सख्त दालों (जैसे चना, राजमा) का सेवन कम करने से भी गैस और एसिडिटी से बचा जा सकता है। सही विधि से बनाई गई और संतुलित मात्रा में खाई गई दाल सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होती है और शरीर को जरूरी प्रोटीन प्रदान करती है।

दाल पकाने, खाने और स्टोर करने में की जाने वाली भूल

दाल सेहत के लिए फायदेमंद होती है, लेकिन इसे सही विधि से पकाना भी बेहद जरूरी है। अगर दाल ठीक से नहीं पकती और हल्की कच्ची रह जाती है, तो इसे पचाना कठिन हो सकता है, जिससे पेट से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। वहीं, ज्यादा पकाने पर इसमें विद्यमान जरूरी विटामिन और मिनरल्स की मात्रा कम हो जाती है। इसलिए दाल को सही विधि से पकाना बेहद जरूरी है।

इसके अलावा, कई लोग दाल को सेहतमंद मानकर एक बार में बहुत ज्यादा मात्रा में खा लेते हैं। लेकिन दाल में विद्यमान रेशा और प्रोटीन की अधिकता ज्यादा मात्रा में लेने से पाचन तंत्र पर असर डाल सकती है। इससे पेट भारी लगने लगता है और गैस की समस्या भी हो सकती है। इसलिए दाल खाते समय पोरशन कंट्रोल का एकाग्रता रखना जरूरी है।

एक और आम गलती दाल को सही विधि से स्टोर न करना है। अगर दाल को खुले में रखा जाए या सही कंटेनर में न रखा जाए, तो उसमें कीड़े, घुन्न और सीलन की समस्या हो सकती है। इससे दाल की स्वरूप कम हो जाती है और पोषक अवयव भी खत्म होने लगते हैं। इसलिए दाल को हमेशा एयरटाइट कंटेनर में ठंडी और सूखी जगह पर स्टोर करें, ताकि यह लंबे समय तक अच्छी बनी रहे और इसके पोषक अवयव सुरक्षित रहें।

digital@vaartha.com

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