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Delhi- संसद में बोलने की पूरी आजादी, लेकिन अनुशासन भी जरूरी- ओम बिरला

Author Icon By Anuj Kumar
Updated: March 12, 2026 • 1:33 PM
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New Delhi । लोकसभा में हाल के दिनों में बढ़ते राजनीतिक टकराव और तीखी बहसों के बीच लोकसभा अध्यक्ष (Om Birla) ने स्पष्ट किया है कि सदन में हर सदस्य को अपनी बात रखने की पूरी स्वतंत्रता है, लेकिन यह स्वतंत्रता सदन के नियमों और मर्यादाओं के भीतर ही होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि कोई सदस्य नियमों और सदन की गरिमा का उल्लंघन करता है तो अध्यक्ष को व्यवस्था बनाए रखने के लिए कड़े फैसले लेने पड़ते हैं।

लोकतंत्र की ताकत है खुली बहस

ओम बिरला ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में सदन ने लोकतंत्र (Democracy) की एक महत्वपूर्ण परंपरा को निभाया है। उन्होंने बताया कि उन्होंने सभी सदस्यों की बातें ध्यान से सुनीं, चाहे वे उनकी आलोचना ही क्यों न कर रहे हों। उनके अनुसार संसद की यही विशेषता है कि यहां हर आवाज को सुना जाता है और हर सदस्य को अपनी बात रखने का अवसर मिलता है।

माइक बंद करने के आरोपों पर सफाई

सदन में माइक बंद किए जाने के आरोपों पर स्पीकर ने कहा कि चेयर के पास किसी सदस्य का माइक बंद करने का कोई बटन नहीं होता। उन्होंने कहा कि कई विपक्षी सदस्य भी समय-समय पर इस कुर्सी पर बैठ चुके हैं, इसलिए उन्हें संसदीय प्रक्रिया की जानकारी होनी चाहिए।

नियमों से ऊपर कोई नहीं

स्पीकर ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष का पद किसी व्यक्ति विशेष का नहीं बल्कि लोकतंत्र की भावना का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सदन में कोई भी सदस्य नियमों से ऊपर नहीं है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री (Narendra Modi) को भी नियमों का पालन करना पड़ता है। नियम 372 के तहत प्रधानमंत्री को भी किसी विषय पर बोलने से पहले अध्यक्ष की अनुमति लेनी होती है।

महिला सांसदों को पर्याप्त अवसर

महिला सांसदों को कम अवसर मिलने के आरोपों पर ओम बिरला ने कहा कि यह धारणा सही नहीं है। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात पर गर्व है कि उनके कार्यकाल में महिला सांसदों को अपने विचार रखने का पूरा अवसर दिया गया है।

सदन में व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिकता

बजट चर्चा के दौरान हुई एक घटना का उल्लेख करते हुए स्पीकर ने बताया कि कुछ महिला सांसद ट्रेजरी बेंच की ओर जाकर नारेबाजी करने की कोशिश कर रही थीं। उन्होंने कहा कि उस समय स्थिति को संभालने और व्यवस्था बनाए रखने के लिए उन्होंने सत्ता पक्ष के नेता से सदन में न आने का अनुरोध किया था।

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निलंबन जैसे कदम अंतिम विकल्प

निलंबन के मुद्दे पर ओम बिरला ने कहा कि उनका सभी सदस्यों से व्यक्तिगत संबंध है और वे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर काम करने की कोशिश करते हैं। हालांकि सदन की व्यवस्था बनाए रखना उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि यह सोचने की जरूरत है कि ऐसी स्थिति क्यों बनती है जब निलंबन जैसे कठोर कदम उठाने पड़ते हैं। अंत में उन्होंने सभी सांसदों से सदन की गरिमा और मर्यादा बनाए रखने की अपील की।

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