Latest Hindi News : वोटर आईडी बनने की पूरी प्रक्रिया-बीएलओ की जिम्मेदारियाँ और रोल

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वोटर आईडी
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नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने एक बार फिर वोटर लिस्ट में धांधली का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि पिछले साल हरियाणा में हुए विधानसभा चुनावों में डाले गए हर आठ में से एक वोट फर्जी था। राहुल ने एक महिला की तस्वीर दिखाते हुए दावा किया कि इस महिला ने हरियाणा के 10 बूथों पर 22 वोट डाले हैं। इसके बाद वोटर आईडी कार्ड बनने और बीएलओ के काम की चर्चा हो रही है कि आखिर किन कारणों से ऐसी गलतियां हो जाती हैं।

बीएलओ क्या होता है?

राजस्थान और हरियाणा के बीएलओ से बातचीत में यह सामने आया कि वोटर आईडी बनाने की प्रक्रिया में बीएलओ की भूमिका सबसे अहम होती है। बीएलओ यानी बूथ लेवल ऑफिसर (Booth Level Officer) का मुख्य काम होता है —

  • नए वोटरों का सत्यापन करना,
  • पुरानी जानकारी अपडेट करना,
  • और मृत या स्थानांतरित मतदाताओं का नाम सूची से हटाना।

बीएलओ एक तरह से वो कड़ी है जो मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने या संशोधित करने की अनुमति देता है।

कैसे काम करता है बीएलओ सिस्टम

बीएलओ अपने क्षेत्र की वोटर लिस्ट (Voter List) को अपडेट रखने के लिए घर-घर जाकर या मतदान केंद्रों पर कैंप लगाकर सत्यापन करता है। साथ ही, तैयार हुए वोटर आईडी कार्ड को मतदाताओं तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी उसी की होती है। सरकारी कर्मचारी को ही बीएलओ नियुक्त किया जाता है, और जिला चुनाव अधिकारी के कार्यालय से उसे कार्य क्षेत्र (भाग संख्या) सौंपी जाती है।

ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीके

वोटर आईडी बनाने का प्रोसेस दो तरीकों से होता है — ऑनलाइन और ऑफलाइन।

  • ऑनलाइन प्रक्रिया में, जब कोई व्यक्ति नया नाम जोड़ता या अपडेट करता है, तो बीएलओ के मोबाइल ऐप पर नोटिफिकेशन आता है। बीएलओ फिर मौके पर जाकर या अन्य दस्तावेज देखकर वेरिफिकेशन करता है।
  • ऑफलाइन प्रक्रिया में, बीएलओ फॉर्म-6 भरवाकर सभी जरूरी दस्तावेजों के साथ जिला चुनाव कार्यालय में जमा कराता है।

बीएलओ का मेहनताना और चुनौतियाँ

हरियाणा और राजस्थान के बीएलओ के मुताबिक, उन्हें सालाना 6000 रुपये का भत्ता मिलता है, जिसे बढ़ाकर 12000 रुपये करने की मांग उठी है।
फोटो या डेटा में गड़बड़ी तकनीकी कारणों या जल्दबाजी में गलत अपलोडिंग की वजह से हो सकती है। कई बार तय समय सीमा में रिपोर्ट भेजने के दबाव में ऐसी गलतियाँ हो जाती हैं।

नया वोटर लिंकिंग सिस्टम

चुनाव आयोग ने बताया कि स्पेशल समरी रिवीजन (SIR) के दौरान बीएलओ हर घर जाकर मतदाताओं को यूनिक एन्यूमेरेशन फॉर्म देंगे।

  • अगर किसी का नाम 2003 की सूची में या उसके माता-पिता का नाम उसमें मौजूद है, तो उसे कोई दस्तावेज नहीं देना होगा।
  • बीएलओ का मुख्य काम मतदाता को 2003 की सूची से लिंक करना होगा।
  • इसके बाद ड्राफ्ट लिस्ट जारी की जाएगी, और जिनका नाम नहीं होगा, उन्हें दस्तावेज देने होंगे।

बीएलए कौन होते हैं?

बीएलए (बूथ लेवल एजेंट) राजनीतिक पार्टियों की ओर से नियुक्त प्रतिनिधि होते हैं। ये बीएलओ की सहायता करते हैं, लेकिन सरकार के कर्मचारी नहीं होते।

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Anuj Kumar

लेखक परिचय

Anuj Kumar

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