नागपुर। छत्रपति शिवाजी महाराज और समर्थ रामदास स्वामी (Ramdas Swami) के बारे में अपनी टिप्पणी को लेकर विवादों में घिरे बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (Dhirendra Krishna Shastri) ने माफी मांग ली है। रविवार को नागपुर (Nagpur) में उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि उनके बयान का गलत अर्थ निकाला गया है।
बयान पर सफाई और माफी
धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि वे जिस स्वराज और हिंदू राष्ट्र की अवधारणा का सम्मान करते हैं, उसमें छत्रपति शिवाजी महाराज का स्थान सर्वोच्च है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे कभी भी उनके बारे में नकारात्मक सोच भी नहीं सकते। उन्होंने कहा कि अगर किसी की भावनाएं आहत हुई हैं, तो वह इसके लिए खेद व्यक्त करते हैं।
संदर्भ को तोड़कर पेश करने का आरोप
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, शास्त्री ने कहा कि उनका बयान संदर्भ से काटकर पेश किया गया। उन्होंने बताया कि वे एक शिष्य की अपने गुरु के प्रति भक्ति का उदाहरण दे रहे थे। उन्होंने महाभारत का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे अर्जुन ने भगवान कृष्ण से मार्गदर्शन मांगा था, उसी तरह शिवाजी महाराज की अपने गुरु समर्थ रामदास स्वामी के प्रति गहरी आस्था थी।
विवाद की जड़ क्या है
दरअसल, नागपुर में अपने एक बयान में धीरेंद्र शास्त्री ने कहा था कि शिवाजी महाराज युद्धों से थक गए थे और उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों को त्यागने की इच्छा जताई थी। उन्होंने यह भी कहा था कि शिवाजी महाराज अपना मुकुट लेकर गुरु रामदास के पास पहुंचे और उनके चरणों में रख दिया।
अन्य पढ़े: वरिष्ठ नागरिकों के लिए सुरक्षित और आकर्षक निवेश
गुरु रामदास का संदेश
शास्त्री के अनुसार, उस समय गुरु रामदास ने मुकुट वापस शिवाजी महाराज के सिर पर रख दिया और उन्हें समझाया कि थकान के बावजूद अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना ही सच्ची सेवा है। इस बयान के बाद विवाद बढ़ गया, जिसके चलते अब धीरेंद्र शास्त्री को सार्वजनिक रूप से सफाई देनी पड़ी और माफी मांगनी पड़ी।
Read More :