फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के नए विकल्प
नई दिल्ली: शेयर बाजार की अनिश्चितता के दौर में वरिष्ठ नागरिकों (Senior Citizens) के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) निवेश का सबसे भरोसेमंद जरिया बना हुआ है। वर्तमान में, स्मॉल फाइनेंस बैंक (SFBs) निवेश पर सबसे आकर्षक रिटर्न दे रहे हैं, जहाँ ब्याज दरें 8.5% तक पहुँच गई हैं। उदाहरण के लिए, ईएसएएफ (ESAF) स्मॉल फाइनेंस बैंक 501 दिनों की अवधि पर 8.50% ब्याज की पेशकश कर रहा है। इसके अलावा, सूर्योदय, शिवालिक और जन स्मॉल फाइनेंस बैंक भी 8.00% से 8.30% के बीच ब्याज दरें प्रदान कर रहे हैं, जो सरकारी और बड़े प्राइवेट बैंकों की तुलना में काफी अधिक हैं।
एफडी लैडरिंग और निवेश प्रबंधन की कला
विशेषज्ञों के अनुसार, वरिष्ठ नागरिकों को अपनी पूंजी को एक ही एफडी में लगाने के बजाय उसे अलग-अलग अवधियों में विभाजित करना चाहिए, जिसे ‘एफडी लैडरिंग’ कहा जाता है। इस रणनीति के तहत निवेश को छोटी, मध्यम और लंबी अवधि में बांटने से न केवल ब्याज दरों में होने वाले बदलाव का फायदा मिलता है, बल्कि आपातकालीन स्थिति में लिक्विडिटी बनी रहती है। साथ ही, बेहतर पोर्टफोलियो बनाने के लिए एफडी के साथ ‘सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम’ (SCSS) जैसे विकल्पों को भी शामिल करना एक समझदारी भरा कदम हो सकता है।
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टैक्स बचत और फॉर्म 15H की भूमिका
एफडी से होने वाली कमाई पर मिलने वाला ब्याज निवेशक के टैक्स स्लैब के अनुसार कर योग्य होता है, जिस पर बैंक टीडीएस (TDS) काटते हैं। हालाँकि, वरिष्ठ नागरिकों के पास कर बचाने का एक प्रभावी उपाय है: ‘फॉर्म 15H’। यह एक सेल्फ-डिक्लेरेशन फॉर्म है जिसे 60 वर्ष से अधिक उम्र के नागरिक तब जमा कर सकते हैं, जब उनकी कुल वार्षिक आय कर योग्य सीमा से कम हो। इस फॉर्म को बैंक में जमा करने से उनकी ब्याज आय पर कोई टीडीएस नहीं काटा जाता, जिससे उन्हें पूरी राशि का लाभ मिलता है।
क्या है एफडी लैडरिंग और यह बुजुर्गों के लिए क्यों फायदेमंद है?
एफडी लैडरिंग का अर्थ है अपनी कुल निवेश राशि को एक लंबी अवधि की एफडी में लगाने के बजाय अलग-अलग समय अवधि (जैसे 1, 2 और 3 साल) की छोटी एफडी में बांटना। इससे आपको जरूरत पड़ने पर समय-समय पर पैसा मिलता रहता है और ब्याज दरों में वृद्धि का लाभ भी मिलता रहता है।
फॉर्म 15H जमा करने का मुख्य लाभ क्या है?
फॉर्म 15H वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक स्व-घोषणा पत्र है। यदि किसी वरिष्ठ नागरिक की कुल अनुमानित वार्षिक आय टैक्स सीमा से कम है, तो वे बैंक में यह फॉर्म जमा करके अपनी ब्याज आय पर कटने वाले टीडीएस (TDS) को पूरी तरह रोक सकते हैं।
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