नई दिल्ली। भारत अपनी रक्षा क्षमता को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। डीआरडीओ (DRDO) अब 100 किलोवाट के अत्याधुनिक लेजर वेपन के परीक्षण की तैयारी में है, जिसे महत्वाकांक्षी “दुर्गा” प्रोग्राम (Durga Programme) के तहत विकसित किया जा रहा है।
‘दुर्गा’ प्रोग्राम से बढ़ेगी ताकत
दुर्गा प्रोग्राम का उद्देश्य ऐसा डायरेक्टेड एनर्जी (Directed Energy) हथियार तैयार करना है, जो दुश्मन के ड्रोन, मिसाइल और लड़ाकू विमानों को पलक झपकते ही नष्ट कर सके। इसके जरिए भारत पारंपरिक हथियारों पर निर्भरता कम करने और कम लागत में प्रभावी रक्षा प्रणाली विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।
हाई एनर्जी लेजर की मारक क्षमता
यह 100 किलोवाट लेजर वेपन हाई एनर्जी से लैस होगा और प्रकाश की गति से दुश्मन के हथियारों को निशाना बना सकेगा। खास बात यह है कि यह मिसाइलों की तुलना में ज्यादा किफायती और तेज प्रतिक्रिया देने वाला सिस्टम होगा।
नौसेना के स्टील्थ युद्धपोतों पर तैनाती
फिलहाल इस अत्याधुनिक हथियार को भारतीय नौसेना के स्टील्थ युद्धपोतों के लिए डिजाइन किया जा रहा है। भारतीय नौसेना की योजना है कि इसे अपने जंगी बेड़े में शामिल कर समुद्री सुरक्षा को और मजबूत किया जाए।
ड्रोन और मिसाइल खतरे का त्वरित जवाब
लेजर वेपन के शामिल होने से युद्धपोत दुश्मन के ड्रोन झुंडों को तुरंत नष्ट कर सकेंगे और आने वाली मिसाइलों का रियल टाइम में मुकाबला कर पाएंगे। इससे युद्ध के दौरान प्रतिक्रिया समय बेहद कम हो जाएगा।
मल्टी-लेयर डिफेंस सिस्टम की ओर कदम
इस तकनीक के आने से भारतीय युद्धपोतों को मिसाइल, तोप और लेजर का संयुक्त मल्टी-लेयर डिफेंस सिस्टम मिलेगा। इससे गोला-बारूद पर निर्भरता कम होगी और युद्धक रणनीति अधिक आधुनिक व प्रभावी बनेगी।
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भारत बनेगा हाईटेक रक्षा शक्ति
यदि यह परीक्षण सफल रहता है, तो भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा जिनके पास डायरेक्टेड एनर्जी वेपंस की उन्नत तकनीक मौजूद है। यह देश की रक्षा क्षमता को वैश्विक स्तर पर और मजबूत करेगा।
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