मुंबई । महाराष्ट्र की सियासत में तब हलचल मच गई जब मुंबई (Mumbai) के बांद्रा इलाके में स्थित पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के घर ‘मातोश्री’ के ऊपर एक ड्रोन मंडराता देखा गया। उद्धव गुट (Shivsena UBT) ने इसे सरकार की जासूसी कार्रवाई बताते हुए सवाल उठाए हैं कि आखिर हाई सिक्योरिटी ज़ोन में बिना अनुमति ड्रोन कैसे उड़ाया गया। उद्धव के बेटे आदित्य ठाकरे ने एक्स पर लिखा कि ड्रोन हमारे घर की खिड़की के पास तक आ गया था, जैसे ही हमने रिकॉर्डिंग शुरू की, वह तेजी से दूर चला गया। यह घटना चौंकाने वाली है, लेकिन अब हैरान नहीं करती, क्योंकि देश एक ‘सर्विलांस स्टेट’ में बदल चुका है।
एमएमआरडीए की सफाई- टैक्सी प्रोजेक्ट के सर्वे का हिस्सा था ड्रोन
इस आरोप के बाद मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवपलपमेंट अथॉरिटी (MMRDA) ने सफाई दी कि ड्रोन को पीओडी टैक्सी प्रोजेक्ट के सर्वे के लिए उड़ाया गया था और इसके लिए मुंबई पुलिस से बाकायदा अनुमति ली गई थी। एमएमआरडीए के मुताबिक ड्रोन सर्वे बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स क्षेत्र में किया गया था ताकि पर्सनल रैपिड ट्रांजिट टैक्सी प्रोजेक्ट के रूट का विजुअल स्टडी किया जा सके। अथॉरिटी ने कहा कि पुलिस की मौजूदगी में यह ऑपरेशन पूरी तरह अनुमत मार्ग पर हुआ और इसमें किसी भी प्रकार की सुरक्षा उल्लंघन नहीं हुई।
शिवसेना यूबीटी की मांग- ड्रोन ऑपरेटर की पहचान की जाए
मुंबई पुलिस के डीसीपी ज़ोन 8 ने कहा कि ड्रोन उड़ाने की अनुमति एमएमआरडीए को दी गई थी और यह सर्वे का हिस्सा था, किसी और कोण से न देखा जाए। हालांकि उद्धव गुट इसे सरकार की सर्विलांस पॉलिसी बता रहा है। शिवसेना (यूबीटी) नेता अनिल परब ने मांग की कि पुलिस को इस पूरे मामले की जांच करनी चाहिए और ड्रोन ऑपरेटर की पहचान कर स्पष्ट करना चाहिए कि उसके पीछे की मंशा क्या थी। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब ड्रोन सर्वे की अनुमति थी, तो मातोश्री जैसे संवेदनशील इलाके के निवासियों को पहले से सूचित क्यों नहीं किया गया?
सियासी माहौल गरमाया -‘ड्रोन पॉलिटिक्स’ ने बढ़ाई हलचल
अब यह मामला सियासी जासूसी बनाम सरकारी सर्वे के बीच घिर गया है, जहां ठाकरे गुट इसे निजता पर हमला बता रहा है, वहीं सरकार समर्थक एजेंसियां इसे तकनीकी सर्वे का गलत अर्थ मान रही हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनावी मौसम में यह “ड्रोन पॉलिटिक्स” महाराष्ट्र की सियासत को और गरमाने वाली है।
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