Syed hamid : भारतीय फुटबॉल इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय समाप्त हो गया देश के गौरव और पूर्व ओलंपियन सैयद हबीबुल हसन हमीद का 85 वर्ष की उम्र में हैदराबाद में निधन हो गया वह पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे और शुक्रवार सुबह अपने घर पर उन्होंने अंतिम सांस ली।
उनके निधन की खबर से खेल जगत में शोक की लहर दौड़ गई है हैदराबाद के विजय नगर कॉलोनी में उनका अंतिम संस्कार किया गया।
1960 के रोम ओलंपिक में भाग लेना उनके करियर का सबसे महत्वपूर्ण क्षण था केवल 19 वर्ष की उम्र में भारतीय टीम के लिए चुने गए और उस ओलंपिक में खेलने वाले सबसे युवा भारतीय खिलाड़ी बने।
इसके अलावा 1960 एशिया कप में उपविजेता रही भारतीय टीम का भी वह अहम हिस्सा थे ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले हैदराबाद के महान खिलाड़ियों में उनका नाम शामिल है।
1941 में संयुक्त नलगोंडा जिले के भुवनगिरी में जन्मे हमीद ने हैदराबाद में ही फुटबॉल खेलना शुरू किया और एक तेजतर्रार फॉरवर्ड खिलाड़ी के रूप में अपनी पहचान बनाई।
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उन्होंने पीके बनर्जी चुनी गोस्वामी और लतीफ जैसे महान (Syed hamid) खिलाड़ियों के साथ खेला उनके करियर को आगे बढ़ाने में कोच एस ए रहीम का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
उन्होंने हैदराबाद स्पोर्टिंग हैदराबाद पुलिस और कोलकाता के मशहूर मोहम्मडन स्पोर्टिंग क्लब की कप्तानी भी की।
अपने अंतिम दिनों में वह इस बात से दुखी रहते थे कि कभी भारतीय फुटबॉल की नर्सरी कहलाने वाला हैदराबाद अब अपनी पुरानी पहचान खो रहा है।
उनके निधन पर भारत के पूर्व कप्तान विक्टर अमलराज और तेलंगाना फुटबॉल संघ के पदाधिकारियों ने गहरा शोक व्यक्त किया।
सैयद हमीद अपने पीछे एक बेटे और चार बेटियों को छोड़ गए उनकी पत्नी का निधन पहले ही हो चुका था भारतीय फुटबॉल में उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।
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