जम्मू,। ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की मौत और तेहरान पर हुए भीषण हमलों की गूंज अब कश्मीर की वादियों में पुरजोर तरीके से सुनाई दे रही है। इस घटनाक्रम ने घाटी के राजनीतिक और सामाजिक माहौल में भारी तनाव पैदा कर दिया है। (Mehbooba Mufti) के नेतृत्व में श्रीनगर में विरोध प्रदर्शन किया गया, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और इजरायली प्रधानमंत्री (Benjamin Netanyahu) के पोस्टर जलाकर विरोध जताया गया।
महबूबा मुफ्ती का केंद्र सरकार पर हमला
महबूबा मुफ्ती ने केंद्र सरकार के रुख पर तीखा हमला बोलते हुए गहरी निराशा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने अब तक न तो इन हमलों की निंदा की है और न ही ईरान की जनता के प्रति कोई सहानुभूति दिखाई है। भारत और ईरान के ऐतिहासिक संबंधों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि ईरान ने हमेशा कश्मीर मुद्दे पर भारत के रुख का अंतरराष्ट्रीय मंचों पर समर्थन किया है, जबकि कई अन्य मुस्लिम देश उस समय पाकिस्तान के साथ खड़े थे। उन्होंने यह भी कहा कि जब भारत अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के दौर से गुजर रहा था, तब ईरान ने ही संकट के समय कर्ज पर तेल देकर भारत की मदद की थी। उनके अनुसार ऐसे पुराने सहयोगी देश के कठिन समय में भारतीय नेतृत्व की चुप्पी बेहद दुखद है।
उमर अब्दुल्ला की चुप्पी पर सवाल
विरोध प्रदर्शन के दौरान महबूबा मुफ्ती ने जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री (Omar Abdullah) की चुप्पी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने प्रशासन द्वारा श्रीनगर के सांसद Aga Ruhullah Mehdi और पूर्व मेयर Junaid Azim Mattu के खिलाफ दर्ज एफआईआर को तुरंत वापस लेने की मांग की। महबूबा ने आरोप लगाया कि पिछले तीन दिनों में विरोध प्रदर्शन करने वाली कई युवा लड़कियों और आम नागरिकों को हिरासत में लेकर जेल में डाल दिया गया है। उन्होंने कहा कि एक लोकतांत्रिक देश में हर नागरिक को विरोध करने का संवैधानिक अधिकार है और सरकार किसी को भी चुप रहने के लिए मजबूर नहीं कर सकती।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अपील
महबूबा मुफ्ती ने कहा कि कश्मीर के लोग और वैश्विक मुस्लिम समुदाय इस समय ईरान के साथ खड़े हैं। उन्होंने मारे गए लोगों को शहीद बताते हुए उनकी बहादुरी को नमन किया। हालांकि स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए उन्होंने कश्मीरी युवाओं से अपील की कि विरोध प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रखा जाए। उन्होंने कहा कि कश्मीर की अर्थव्यवस्था और पर्यटन अब धीरे-धीरे पटरी पर लौट रहे हैं और किसी भी तरह की हिंसा से इन पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
घाटी में सुरक्षा के कड़े इंतजाम
इस बीच, घाटी में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। शिया बहुल इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और प्रशासन पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है।
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