रांची,। बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन द्वारा जेएमएम (JMM) को एक भी सीट न दिए जाने के बाद से झारखंड की सियासत में अजीबोगरीब अफवाहों का बाजार गर्म है। इन अफवाहों को उस वक्त और बल मिला जब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Hemant Soren) अपनी पत्नी कल्पना सोरेन के साथ 28 नवंबर की देर शाम दिल्ली पहुंचे। सोशल मीडिया पर यह दावा तेजी से वायरल होने लगा कि दोनों ने भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से गुप्त मुलाकात की है और बहुत जल्द झारखंड (Jharkhand) का राजनीतिक परिदृश्य बदलने वाला है। कहा जाने लगा कि इंडिया गठबंधन में नाराज चल रहे हेमंत सोरेन एनडीए में शामिल होने जा रहे हैं।
झामुमो ने अफवाहों पर लगाया पूर्ण विराम
हालांकि झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने इन अफवाहों पर तुरंत पूर्ण विराम लगा दिया। पार्टी महासचिव व प्रवक्ता विनोद पांडेय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मुख्यमंत्री का दिल्ली दौरा पूरी तरह निजी था। उन्होंने भाजपा पर तंज कसते हुए कहा, भाजपा का काम ही अफवाह और साजिश फैलाना है। लेकिन झामुमो के तीन शब्द हैं– झारखंड झुकेगा नहीं।
यूथ विंग और कांग्रेस का रुख
झामुमो यूथ विंग ने भी सोशल मीडिया पर पोस्ट कर लिखा, हेमंत सोरेन नाम ही काफी है। संघर्ष से सीखा है, सेवा से जीता है और न्याय के लिए लड़ना आता है। दूसरी तरफ भाजपा ने भी इन अटकलों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि दोनों पार्टियां विचारधारा के धुर विपरीत ध्रुव हैं। प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा, भाजपा और झामुमो नदी नहीं, समुद्र के दो अलग-अलग किनारे हैं। कांग्रेस ने भी इसे भाजपा की साजिश बताया और कहा कि हेमंत सोरेन का भाजपा के साथ जाना तो दूर, उसकी कल्पना भी बेमानी है।
राजनीतिक विश्लेषण
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भाजपा जानबूझकर इस तरह की अफवाहें फैलाकर महागठबंधन में फूट के संकेत पैदा करना चाहती है, लेकिन झामुमो के त्वरित और कड़े जवाब ने उसके मंसूबों पर पानी फेर दिया है। झारखंड की जनता भी इन अफवाहों को पूरी तरह नकार चुकी है।
हेमंत सोरेन कौन हैं?
हेमंत सोरेन (जन्म 10 अगस्त 1975) झारखंड के राजनीतिज्ञ हैं। जो झारखंड के पांचवें मुख्यमंत्री थे, उन्होंने दो बार झारखंड के मुख्यमंत्री का पद संभाला है। उन्होंने जुलाई 2013 से दिसंबर 2014 और दिसम्बर 2019 से जनवरी 2024 तक झारखंड के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया।
झारखंड मुक्ति मोर्चा का इतिहास क्या है?
पार्टी की आधिकारिक स्थापना 19वीं सदी के झारखंड के आदिवासी योद्धा बिरसा मुंडा के जन्मदिन पर हुई थी, जिन्होंने इस क्षेत्र में ब्रिटिश शासन के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। 4 फ़रवरी 1973 को महतो पार्टी के अध्यक्ष और सोरेन महासचिव बने। उस समय पार्टी के प्रमुख नेताओं में रॉय, निर्मल महतो और टेक लाल महतो जैसे नेता शामिल थे।
Read More :