नई दिल्ली। बीती रात लगा चंद्र ग्रहण देश के कई हिस्सों में साफ तौर पर देखा गया। मौसम अनुकूल रहने के कारण उत्तर भारत से लेकर मध्य और पूर्वी भारत के कई शहरों में लोगों ने इस खगोलीय घटना का प्रत्यक्ष दर्शन किया। आसमान में चांद पर पड़ती पृथ्वी की छाया ने देर रात तक लोगों को रोमांचित किया। खगोलविदों के अनुसार, यह ग्रहण भारत के अधिकांश हिस्सों में आंशिक रूप से दिखाई दिया। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में लोगों ने अपने घरों की छतों और खुले मैदानों से इसे देखा। वहीं मुंबई (Mumbai) और कोलकाता (Kolkatta) जैसे महानगरों में भी ग्रहण का असर साफ नजर आया।
कुछ पर्वतीय क्षेत्रों और दक्षिण भारत के हिस्सों में बादलों की आवाजाही के कारण दृश्यता आंशिक रूप से प्रभावित रही, लेकिन अधिकांश स्थानों पर आसमान साफ रहने से ग्रहण का सुंदर दृश्य देखने को मिला।

धार्मिक मान्यता और ग्रहण का महत्व
हिंदू शास्त्रों में ग्रहण को विशेष खगोलीय घटना माना गया है। मान्यता है कि ग्रहण के दौरान वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है। इसलिए ग्रहण काल में जप, तप और ध्यान का विशेष महत्व बताया गया है। ग्रहण के मोक्ष काल के बाद स्नान और दान को शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण समाप्त होने के बाद पवित्र नदियों के जल या गंगाजल मिले जल से स्नान करना लाभकारी होता है।
ग्रहण के बाद क्या करें?
धार्मिक परंपराओं के मुताबिक, ग्रहण के बाद निम्न कार्य करना शुभ माना जाता है—
- गंगाजल मिले जल से स्नान करना।
- चावल या सफेद वस्त्र का दान करना, जिससे चंद्र दोष से मुक्ति मिलती है।
- पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव कर शुद्धिकरण करना।
- भगवान की मूर्तियों को गंगाजल से स्नान कराना और विधि-विधान से पूजा करना।
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वैज्ञानिक दृष्टिकोण
वैज्ञानिकों के अनुसार, चंद्र ग्रहण एक सामान्य खगोलीय प्रक्रिया है, जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और उसकी छाया चंद्रमा पर पड़ती है। इसका मानव जीवन पर कोई प्रत्यक्ष नकारात्मक प्रभाव नहीं होता। हालांकि, धार्मिक आस्था और वैज्ञानिक सोच दोनों के बीच संतुलन बनाते हुए लोग इस खगोलीय घटना को अपने-अपने विश्वास के अनुसार देखते हैं। कुल मिलाकर, देशभर में चंद्र ग्रहण को लेकर उत्साह और जिज्ञासा का माहौल रहा।
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