प्रयागराज। पौष पूर्णिमा स्नान के साथ उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के प्रयागराज (Paryagraj) में माघ मेले का विधिवत शुभारंभ हो गया है। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने मेला क्षेत्र में सुरक्षा और निगरानी के व्यापक इंतजाम किए हैं। पूरे क्षेत्र में पुलिस, एटीएस और प्रशासनिक टीमें मुस्तैद हैं।
एटीएस की मोबाइल पेट्रोलिंग, चौबीसों घंटे निगरानी
श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को ध्यान में रखते हुए पूरे मेला क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी गई है। यूपी एटीएस की मोबाइल पेट्रोलिंग टीमें लगातार गश्त कर रही हैं, ताकि किसी भी तरह की सुरक्षा चूक या अव्यवस्था को रोका जा सके।
सुबह 8 बजे तक 6.5 लाख श्रद्धालुओं ने किया स्नान
माघ मेला अधिकारी ऋषि राज ने बताया कि पौष पूर्णिमा स्नान (Paush Purnima Bath) के साथ माघ मेले की शुरुआत हो चुकी है। संगम क्षेत्र में सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं। उन्होंने बताया कि सुबह 8 बजे तक करीब 6 लाख 50 हजार श्रद्धालु संगम में पवित्र स्नान कर चुके हैं।
श्रद्धालुओं के लिए चेंजिंग रूम और निगरानी की व्यवस्था
मेला प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पर्याप्त चेंजिंग रूम, सुरक्षा और निगरानी की व्यवस्था की है। भीड़ प्रबंधन के लिए कंट्रोल रूम से लगातार निगरानी की जा रही है।

10,000 फुट क्षेत्र में 10 स्नान घाट, क्यूआर कोड से शिकायत सुविधा
प्रयागराज की मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने बताया कि पौष पूर्णिमा स्नान का मुहूर्त शनिवार सुबह चार बजे से शुरू हो गया था। इस अवसर पर 20 से 30 लाख श्रद्धालुओं के गंगा और संगम में डुबकी लगाने की संभावना है।
उन्होंने बताया कि इस बार माघ मेले में 10,000 फुट क्षेत्र में 10 स्नान घाट बनाए गए हैं, जबकि पिछले वर्ष 8,000 फुट क्षेत्र में घाट तैयार किए गए थे। विद्युत विभाग ने मेला सेवा ऐप विकसित किया है, जिसके जरिए बिजली के खंभों पर लगे क्यूआर कोड स्कैन कर श्रद्धालु अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
माघ मेले में पहली बार बाइक टैक्सी सेवा
मंडलायुक्त ने बताया कि इस बार माघ मेले में पहली बार बाइक टैक्सी सेवा शुरू की गई है, जिससे श्रद्धालुओं को स्नान घाटों तक पहुंचने में सुविधा मिलेगी।
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1600 पुलिसकर्मी और 1000 होमगार्ड तैनात
पुलिस आयुक्त जोगेंद्र कुमार ने बताया कि मेला क्षेत्र में 1600 से अधिक पुलिसकर्मी, करीब 1000 होमगार्ड, 400 यातायात पुलिसकर्मी और 38 यातायात उप निरीक्षक तैनात किए गए हैं, ताकि सुरक्षा और यातायात व्यवस्था सुचारु बनी रहे।
प्रयागराज का इतिहास क्या है?
प्रयागराज का इतिहास अत्यंत प्राचीन और समृद्ध है, जो गंगा-यमुना-सरस्वती के संगम के कारण एक पवित्र तीर्थस्थल (तीर्थराज) है, जिसका उल्लेख वेदों में है; यह ब्रह्मा द्वारा पहले यज्ञ के स्थान के रूप में ‘प्रयाग’ कहलाया, बाद में मुगल सम्राट अकबर ने 1583 में इसे ‘इलाहाबाद’ नाम दिया; यह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का केंद्र और ब्रिटिश काल में राजधानी भी रहा, जो ज्ञान, संस्कृति और आध्यात्मिकता का संगम है
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