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National : हर साल 6 हजार से ज्यादा दहेज हत्याएं : एनसीआरबी रिपोर्ट

Anuj Kumar
Anuj Kumar
National : हर साल 6 हजार से ज्यादा दहेज हत्याएं  : एनसीआरबी रिपोर्ट

नई दिल्ली। दहेज का दानव आज भी देश की महिलाओं की जिंदगी निगल रहा है। हाल ही में ग्रेटर नोएडा से सामने आई दर्दनाक घटना ने एक बार फिर इस सामाजिक बुराई को चर्चा में ला दिया है। यहां एक पति ने कथित रूप से पत्नी को जिंदा जला दिया। मृतका के बेटे ने बताया कि पिता ने पहले मां पर कुछ डाला, फिर थप्पड़ मारा और लाइटर से आग लगा दी। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया (Social Media) पर वायरल हो रहा है। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, हालांकि हिरासत में भागने की कोशिश के दौरान पुलिस की गोली लगने से वह घायल हो गया।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के अनुसार, देश में हर साल करीब छह हजार से अधिक महिलाएं दहेज के लिए अपनी जान गंवा रही हैं। साल 2022 में दहेज हत्या के 6,450 साल 2021 में ऐसे मामलों की संख्या लगभग 6,753 रही, जबकि 2020 में 6,966 मामले दर्ज किए गए। हालांकि इन तीन वर्षों में मामूली कमी जरूर दर्ज हुई है, लेकिन आंकड़े अभी भी बेहद भयावह तस्वीर पेश करते हैं।

हर साल हजारों महिलाएं दहेज की भेंट चढ़ती हैं

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़े बताते हैं कि भारत में दहेज आज भी महिलाओं की जान ले रहा है।

  • 2022 में दहेज हत्या के 6,450 मामले दर्ज हुए।
  • 2021 में 6,753 मामले,
  • 2020 में 6,966 मामले सामने आए।

यानी मामूली कमी के बावजूद हालात अब भी भयावह हैं। करीब 80% मामले बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा और ओडिशा जैसे राज्यों से दर्ज हुए।

दर्ज नहीं होते कई मामले

विशेषज्ञों का मानना है कि असली संख्या इससे कहीं अधिक है। पारिवारिक दबाव, सामाजिक शर्म और कानूनी प्रक्रियाओं की जटिलता के कारण पीड़ित परिवार अक्सर पुलिस और अदालत तक नहीं पहुंच पाते।

कानून तो है, पर चुनौतियां भी

भारत में दहेज निषेध अधिनियम, 1961 (Dowry Prohibition Act) लागू है, जिसके तहत दहेज लेना और देना दोनों अपराध हैं। बावजूद इसके इस बुराई पर लगाम कसना आसान नहीं हो पाया।
मुख्य चुनौतियां हैं—

  • मामलों की अधूरी और लापरवाह जांच
  • धीमी न्यायिक प्रक्रिया
  • सामाजिक जागरूकता की कमी

समाधान : जागरूकता और सख्त कार्रवाई

विशेषज्ञों का कहना है कि केवल कानून से समस्या खत्म नहीं होगी। समाज में जागरूकता और मानसिकता में बदलाव जरूरी है। शिक्षा, महिलाओं का सशक्तिकरण और कठोर कार्रवाई ही वह रास्ता है जिससे दहेज प्रथा पर रोक लगाई जा सकती है


दहेज हत्या क्या है?

दहेज हत्या, भारतीय दंड संहिता की धारा 304बी के तहत एक गंभीर अपराध है, जिसमें किसी महिला की शादी के सात साल के भीतर दहेज की मांग को लेकर पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता या उत्पीड़न के कारण होने वाली अप्राकृतिक मृत्यु शामिल है। इस अपराध में महिला को जलाकर, शारीरिक चोट पहुंचाकर या अन्य तरीकों से मार दिया जाता है, और ऐसे मामलों में दोषी को कम से कम सात साल की जेल या आजीवन कारावास की सजा हो सकती है। 

दहेज प्रथा कब खत्म हुई थी?

दहेज़ निषेध अधिनियम, 1961 के महत्वपूर्ण प्रावधान शादी के वक्त, या उससे पहले या उसके बाद कभी भी जो कि उपरोक्त पक्षों से संबंधित हो जिसमें मेहर की रकम सम्मिलित नहीं की जाती, अगर व्यक्ति पर मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरियत) लागू होता हो।

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