पटना । बिहार के शहरी इलाकों में रहने वाले नागरिकों के लिए वंशावली (Family Tree) जारी करने की समस्या का समाधान हो गया है। अब नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत क्षेत्रों में अंचलाधिकारी (CO) ही वंशावली जारी करने के लिए सक्षम होंगे। यह निर्णय राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने स्पष्ट दिशा-निर्देश के साथ लागू किया है।
शहरी इलाकों में वंशावली व्यवस्था हुई स्पष्ट
बिहार सरकार ने कहा है कि इससे शहरी नागरिक अपने संबंधित अंचल कार्यालय से सीधे वंशावली प्राप्त कर सकेंगे। सरकार का मानना है कि यह कदम जमीन से जुड़े प्रशासनिक और कानूनी कार्यों में लोगों की परेशानी को कम करेगा।
पहले क्यों होती थी परेशानी?
पहले शहरी इलाकों में वंशावली जारी करने के लिए कोई तय अधिकारी या स्पष्ट व्यवस्था नहीं थी। इसका असर नामांतरण, दाखिल-खारिज, संपत्ति बंटवारे और न्यायालयी मामलों में पड़ता था। ग्रामीण क्षेत्रों में यह काम सरपंच के माध्यम से होता था, लेकिन शहरी इलाकों में व्यवस्था का अभाव लंबे समय से समस्या बन रहा था।
विधि विभाग की सहमति के बाद आया फैसला
18 दिसंबर को महाधिवक्ता के साथ हुई बैठक के बाद विधि विभाग ने अंचलाधिकारी को वंशावली जारी करने का अधिकार देने को मंजूरी दी और आदेश जारी कर इसे लागू किया।
उपमुख्यमंत्री बोले: पारदर्शी और समयबद्ध सेवा मिलेगी
उपमुख्यमंत्री और राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा (vijay Kumar Sinha) ने कहा कि इस फैसले से नागरिकों को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध सेवा मिलेगी। इससे जमीन से जुड़े मामलों में जनता का भरोसा बढ़ेगा और विवादों में कमी आएगी।
जमीन के कागजात हुए पूरी तरह डिजिटल
सरकार ने राजस्व अभिलेखों की नकल को भी डिजिटल कर दिया है। अब डिजिटल हस्ताक्षरयुक्त भूमि अभिलेख पूरी तरह वैध और मान्य होंगे। लोग घर बैठे ऑनलाइन माध्यम (Online Media) से जमीन से जुड़े दस्तावेज प्राप्त कर सकेंगे।
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शहरी जमीन प्रशासन में बड़ा सुधार
वंशावली की स्पष्ट व्यवस्था और जमीन के कागजात की डिजिटल सुविधा—दोनों फैसले मिलकर शहरी बिहार में भूमि प्रशासन को सरल, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाने में अहम कदम हैं। इससे आने वाले समय में शहरी इलाकों में जमीन से जुड़े विवादों में कमी आने की उम्मीद है।
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