नई दिल्ली। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने (Gujarat) के गिर सोमनाथ में आयोजित ‘सोमनाथ अमृत महोत्सव’ को संबोधित करते हुए भारत की शक्ति, आस्था और सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख किया। इस दौरान उन्होंने (Somnath Temple) के गौरवशाली इतिहास और उसकी अविनाशी पहचान को याद किया।
पोखरण परीक्षण का किया जिक्र
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में पोखरण परमाणु परीक्षण का उल्लेख करते हुए कहा कि 11 मई के परीक्षण के बाद पूरी दुनिया भारत पर दबाव बनाने में जुट गई थी। उन्होंने कहा कि आर्थिक प्रतिबंधों और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद तत्कालीन प्रधानमंत्री (Atal Bihari Vajpayee) के नेतृत्व में भारत ने 13 मई को दो और परमाणु परीक्षण कर दुनिया को अपनी दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति का संदेश दिया था। उन्होंने कहा कि “राष्ट्र प्रथम” भारत का संकल्प है और दुनिया की कोई ताकत भारत को झुका नहीं सकती।
महादेव की भक्ति और दिव्य वातावरण का वर्णन
पीएम मोदी ने कहा कि प्रभास पाटन की पवित्र भूमि आज दिव्य आभा से भरी हुई है। उन्होंने मंदिर परिसर में हो रही पुष्पवर्षा, वैदिक मंत्रोच्चार, संगीत, नृत्य और शिव पंचाक्षरी के अखंड पाठ का उल्लेख करते हुए इसे अद्भुत आध्यात्मिक अनुभव बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि समुद्र की लहरों की गर्जना के बीच ऐसा प्रतीत हो रहा है मानो पूरी सृष्टि एक साथ ‘जय सोमनाथ’ का उद्घोष कर रही हो।
सोमनाथ को बताया शाश्वत और अविनाशी
प्रधानमंत्री ने मंदिर से अपने व्यक्तिगत जुड़ाव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वह कई बार सोमनाथ आ चुके हैं और हर बार यहां आकर नई ऊर्जा और भावनात्मक अनुभूति प्राप्त होती है। मंदिर के इतिहास को याद करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि कई आक्रमणों और विनाश के बावजूद सोमनाथ आज भी अडिग खड़ा है। उन्होंने कहा कि यह मंदिर भारत की आस्था और आत्मबल का प्रतीक है।
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75 वर्ष पूरे होने पर मनाया जा रहा महोत्सव
प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान स्वरूप में सोमनाथ मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के 75 वर्ष पूरे होना केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना का गौरवपूर्ण क्षण है। उन्होंने कहा कि जिसके नाम में ‘सोम’ यानी अमृत हो, उसे कोई नष्ट नहीं कर सकता। महमूद गजनवी और Alauddin Khalji जैसे कई आक्रमणकारियों के हमलों के बावजूद सोमनाथ की पहचान और आस्था हमेशा अमर रही है।
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