नई दिल्ली/गया। बिहार की राजनीति में एक बार फिर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। एनडीए के सहयोगी दल हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर) के संरक्षक और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी (Jitan Ram Manjhi) ने राज्यसभा की एक सीट को लेकर खुलकर अपनी मांग रख दी है। गया में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए मांझी ने गठबंधन में अपनी पार्टी की उपेक्षा का आरोप लगाया और पुराने वादों को सार्वजनिक मंच से दोहराया।
राज्यसभा सीट बंटवारे पर उठाए सवाल
मांझी ने कहा कि मीडिया (Media) में अप्रैल 2026 में होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर सीट बंटवारे की चर्चाएं चल रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक जदयू और भाजपा को दो-दो सीटें जबकि चिराग पासवान की लोजपा (Ramvilash) को एक सीट मिलने की बात कही जा रही है। ऐसे में उन्होंने सवाल उठाया कि उनकी पार्टी को कहां रखा गया है। मांझी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे टकराव नहीं चाहते, लेकिन अपनी पार्टी का हक मांगना जरूरी है।
2024 लोकसभा चुनाव का दिलाया वादा
पूर्व मुख्यमंत्री ने 2024 के लोकसभा चुनाव का जिक्र करते हुए बताया कि उस समय एनडीए नेतृत्व ने उनकी पार्टी को दो लोकसभा सीटें देने का आश्वासन दिया था। बाद में यह वादा बदलकर एक राज्यसभा सीट तक सीमित कर दिया गया। अंततः हम को केवल गया लोकसभा सीट मिली, जिसे जीतकर पार्टी ने एनडीए को मजबूत किया। मांझी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल कर सम्मान दिया, लेकिन राज्यसभा की एक सीट का वादा अभी पूरा नहीं हुआ है।
पार्टी पदाधिकारियों को मांग रखने का संकेत
मांझी ने कहा कि वे पार्टी के संरक्षक हैं, इसलिए औपचारिक तौर पर फैसला या मांग नहीं रख सकते। यह जिम्मेदारी पार्टी अध्यक्ष, प्रवक्ताओं और अन्य पदाधिकारियों की है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि 2024 के चुनावी प्रदर्शन के आधार पर अप्रैल 2026 के राज्यसभा चुनाव में हम पार्टी को एक सीट मिलनी चाहिए।
एनडीए से अलगाव की अटकलों पर सफाई
एनडीए से अलग होने की चर्चाओं पर मांझी ने विराम लगाते हुए कहा कि जब तक पार्टी संगठन उनके साथ है, तब तक गठबंधन छोड़ने का कोई सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके बयानों को गलत संदर्भ में पेश किया जा रहा है।
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राष्ट्रीय मान्यता पर भी दिया जोर
मांझी ने पार्टी को राष्ट्रीय मान्यता दिलाने की जरूरत पर भी बात की। उन्होंने कहा कि फिलहाल पार्टी के पास पर्याप्त विधायक नहीं हैं, इसी वजह से मान्यता नहीं मिल पाई है। अगर 50 से 100 सीटों पर चुनाव लड़कर 6–7 प्रतिशत वोट हासिल किए जाएं और 8 सीटें जीती जाएं, तो राष्ट्रीय मान्यता का रास्ता खुल सकता है।
एनडीए में बढ़ सकती है अंदरूनी चर्चा
मांझी की यह मांग ऐसे समय सामने आई है, जब 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए को बड़ी जीत मिली है और राज्यसभा की पांचों सीटों पर गठबंधन का दबदबा माना जा रहा है। अब देखना यह होगा कि भाजपा और जदयू का शीर्ष नेतृत्व मांझी की मांग पर क्या रुख अपनाता है।
जीतन राम मांझी कौन हैं?
जीतन राम मांझी (जन्म 6 अक्टूबर 1944) एक भारतीय राजनीतिज्ञ हैं, जो 2024 से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री के रूप में कार्यरत हैं। वह वर्तमान में गया निर्वाचन क्षेत्र से सांसद हैं और 20 मई 2014 से 20 फरवरी 2015 तक बिहार के 23वें मुख्यमंत्री थे। वह हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के संस्थापक अध्यक्ष थे।
मांझी का इतिहास क्या है?
ये वास्तव में बिहार की एक जाति हैं जो कभी चूहे मारने का काम किया करते थे। माझी व मुसहर एक ही जाती हैं। कुछ लोग इन्हें कश्यप राजपूतों से भी जोड़ते हैं जो पूरी तरह तार्किक और संगत हैं। विश्वास करते हैं कि इनके पूर्वज पहले गंगा के तटों पर या वाराणसी अथवा इलाहाबाद में रहते थे।
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