नई दिल्ली। जम्मू और चंडीगढ़ एयरपोर्ट के बंद होने के चलते जो पैसेंजर फंसे थे, उनके लिए भारतीय रेल द्वारा विशेष गाड़ियों की व्यवस्था की गई । रेल परिचालन हेतु की गई व्यवस्थाओं की समीक्षा रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने की। स्थिति का पूर्ण जायजा लेने के बाद उन्होंने रेलवे अधिकारियों को निर्देश दिया कि विभिन्न सरकारी एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए सीमावर्ती क्षेत्रों में लोगों की सहायता के लिए गाड़ियों का परिचालन किया जाए। नियमित गाड़ियों के साथ-साथ आवश्यकतानुसार विशेष गाड़ियों का भी परिचालन किया जाए।
रेल मंत्री के निर्देश पर उधमपुर से चार विशेष गाड़ियों का परिचालन
रेल मंत्री के निर्देश पर दिनांक 9 मई को जम्मू तथा उधमपुर से चार विशेष गाड़ियों का परिचालन किया गया । रेलवे ने पहली विशेष गाड़ी 04612 का परिचालन जम्मू स्टेशन से सुबह 10:45 बजे किया जिसमें 12 कोच अनारक्षित श्रेणी के और 12 रिज़र्व क्लास के लगाए गए। 20 कोच वाली वंदे भारत एक्सप्रेस दिन में 12:45 बजे उधमपुर से रवाना हुई और जम्मू तथा पठानकोट के रास्ते नई दिल्ली आई। 22 एलएचबी कोच वाली विशेष गाड़ी का परिचालन संध्या 7:00 बजे जम्मू स्टेशन से किया गया।
एक और वंदे भारत विशेष गाड़ी का परिचालन किया गया
एक और वंदे भारत विशेष गाड़ी का परिचालन किया गया जो दिन में 3:30 पीएम बजे जम्मू से खुली और संध्या में नई दिल्ली स्टेशन पहुंचेगी।
जंग के दौरान हर परिस्थिति से निपटने के लिए रेलवेमैन तैयार: शिव गोपाल मिश्र
इसी क्रम में रेलवेमेंस फेडरेशन के जनरल सेक्रेटरी ने कहा, जंग के दौरान हर परिस्थिति से निपटने के लिए रेलवेमैन तैयार है। संकट के समय में रेलकर्मियों को सिर्फ देश दिखता है। देश की जीवन रेखा रेलवे आम दिनों में यात्रियों की सुविधा के लिए काम करता है । लेकिन जरूरत पड़े तो देश की सुरक्षा और आपातकालिन स्थिति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में पीछे नहीं हटता है । ऑल इंडिया रेलवेमेंस फेडरेशन के जनरल सेक्रेटरी शिव गोपाल मिश्रा ने कहा कि रेलवे हमारे देश में सेकंड लाइन ऑफ डिफेंस है।

हर समय रेलकर्मियों ने बहादुरी का परिचय दिया
ऑल इंडिया रेलवेमेंस फेडरेशन के जनरल सेक्रेटरी शिव गोपाल मिश्रा ने कहा कि रेलवेमैन ने हमेशा अपने आपको ऐसी परिस्थितियों में साबित किया है। 1962 में जब चीन ने आक्रमण किया और उसकी फौज काफी अंदर आ गई थी तब पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के लुमडिंग डिविजन के कर्मचारियों ने अभूतपूर्व साहस का परिचय दिया था। बॉर्डर पर जरूरी सामान लेकर गई ट्रेन वहां बॉर्डर पर फंस गई तो उस समय उसके स्टेशन मास्टर से कहा गया कि सभी लोग भाग गए हैं।दूसरे लोग चले गए हैं, फौज पीछे हट गई है, आप क्यों नहीं जा रहे हैं। तब उन्होंने कहा था कि हमारा साथी ट्रेन लेकर बॉर्डर पर गया है। जब वापस आएगा तभी हम जा सकते हैं, नहीं तो नहीं जा सकते हैं।
हम बार्डर तक गोला-बारूद और रसद पहुंचाएंगे: रेलकर्मी
उन्होंने कहा कि आज की जो परिस्थिति है उसमें रेलवेमैन अपना सर्वस्व न्योछावर करने के लिए तैयार हैं। हम काम के घंटे नहीं देखेंगे, कोई ओवरटाइम नहीं मांगेंगे। हमें ऐसे समय में सिर्फ देश दिखता है। हम बार्डर तक गोला-बारूद और रसद पहुंचाएंगे। जो भी जरूरत होगी उसे पहुंचाएंगे। आने वाले समय में जो भी कुर्बानी देनी होगी, रेलवेमैन सबसे आगे आकर कुर्बानी देंगे। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जमाने में एक ऑपरेशन चला था। उस समय 24 घंटे के अंदर हमने सारे देश से तमाम फौजियों को, गोला-बारूद और रसद को पहुंचाने का काम किया था। रेलवे का हर कर्मचारी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निर्णय के साथ है।
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