नई दिल्ली। भारतीय वायु सेना के प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह (AP Singh) ने देश की हवाई सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण और रणनीतिक दृष्टिकोण साझा किया है। उन्होंने जोर देकर कहा है कि भारत के लिए अगली पीढ़ी की हवाई युद्ध प्रणालियों और हथियारों के विकास के लिए एक विश्वसनीय मित्र देश के साथ रणनीतिक साझेदारी करने का यह सबसे उपयुक्त समय है।
भविष्य की हवाई चुनौतियों के लिए वैश्विक सहयोग जरूरी
नई दिल्ली में आयोजित नेशनल सिक्योरिटी इम्पेरेटिव्स विषय पर एक सेमिनार (Seminar) को संबोधित करते हुए वायु सेना प्रमुख ने कहा कि भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए उन्नत सैन्य विमान इंजन और अत्याधुनिक तकनीक के लिए वैश्विक सहयोग अब अनिवार्य हो गया है।
फ्रांस के साथ रक्षा सहयोग बना मजबूत आधार
वायु सेना प्रमुख ने विशेष रूप से फ्रांस के साथ हालिया रक्षा सहयोग का उदाहरण देते हुए कहा कि लड़ाकू विमानों के इंजन विकास को लेकर जो निर्णय लिए गए हैं, वे इस दिशा में एक मजबूत आधार साबित हो सकते हैं। उन्होंने वर्तमान वैश्विक उथल-पुथल की ओर इशारा करते हुए चेतावनी दी कि किसी भी देश के लिए एक मजबूत सैन्य शक्ति, विशेषकर वायु शक्ति को बढ़ाना अब विकल्प नहीं बल्कि जरूरत बन गया है।
निर्भरता के लिए इच्छाशक्ति मजबूत, तकनीक में सहयोग जरूरी
उनके अनुसार, भारत के पास रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के लिए आवश्यक इच्छाशक्ति और मानव संसाधन की कोई कमी नहीं है, लेकिन तकनीकी स्तर पर कुछ ऐसी बाधाएं हैं जिन्हें पार करने के लिए बाहरी सहयोग की आवश्यकता है। एयर चीफ मार्शल ने कहा कि यद्यपि भारत अपने दम पर तकनीक विकसित करने में सक्षम है, लेकिन मौजूदा क्षेत्रीय सुरक्षा हालात को देखते हुए हमारे पास ज्यादा समय नहीं है।
तेज निर्णय और मेक इन इंडिया पर जोर
उन्होंने अनुसंधान एवं विकास के साथ-साथ मेक इन इंडिया के तहत त्वरित निर्णय लेने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि निकट भविष्य में आवश्यक हथियार और प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराए जा सकें।
लड़ाकू स्क्वाड्रन की संख्या चिंता का विषय
वायु सेना प्रमुख का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारतीय वायु सेना के बेड़े में लड़ाकू विमानों की संख्या घटकर 29 स्क्वाड्रन रह गई है, जो पिछले छह दशकों में सबसे कम है। देश की सुरक्षा के लिए कम से कम 42 स्क्वाड्रन की आवश्यकता बताई जाती है।
114 राफेल विमानों की खरीद को मिली शुरुआती मंजूरी
वायु सेना की युद्धक क्षमता बढ़ाने की दिशा में हाल ही में एक बड़ी राहत की खबर भी सामने आई है। रक्षा खरीद बोर्ड ने फ्रांस की कंपनी दसॉ एविएशन से 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के प्रस्ताव को शुरुआती मंजूरी दे दी है। यह प्रक्रिया मेक इन इंडिया ढांचे के तहत पूरी होगी, जिसमें फ्रांसीसी कंपनी एक भारतीय साझेदार के साथ मिलकर जेट विमानों का निर्माण करेगी।
तेजस की देरी से वायु सेना की बढ़ी चिंता
इस प्रस्ताव को अब रक्षा खरीद परिषद और सुरक्षा पर मंत्रिमंडलीय समिति से अंतिम मंजूरी मिलनी है। वायु सेना प्रमुख ने बताया कि सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को 180 तेजस मार्क-1ए विमानों का ऑर्डर दिया गया है, लेकिन आपूर्ति में देरी के कारण वायु सेना को अन्य विकल्पों पर भी विचार करना पड़ रहा है।
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अगली पीढ़ी की तकनीक से ही बनेगी वैश्विक हवाई शक्ति
उन्होंने भरोसा दिलाया कि तकनीकी कमियों को समय के साथ दूर कर लिया जाएगा, लेकिन सशस्त्र बलों को हर परिस्थिति के लिए तैयार रहना होगा। अगली पीढ़ी की तकनीक के साथ तालमेल ही भारत को हवाई युद्ध के क्षेत्र में एक वैश्विक शक्ति बनाएगा।
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