नई दिल्ली,। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने विधवा बहुओं को उनके ससुर की संपत्ति से भरण-पोषण का अधिकार देते हुए अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने अपने फैसले में मनुस्मृति (Manusamriti) का उल्लेख किया और कहा कि माता, पिता, पत्नी और पुत्र को कभी नहीं छोड़ना चाहिए। इसी सिद्धांत के आधार पर विधवा बहू को संपत्ति से भरण-पोषण का हक मिला।
ससुर के जीवन या मृत्यु पर भेदभाव खारिज
मामले में तर्क दिया गया था कि यदि बहू ससुर की मृत्यु के बाद विधवा होती है तो उसे भरण-पोषण का हक नहीं मिलेगा। सुप्रीम कोर्ट ने इसे पूरी तरह खारिज कर दिया और कहा कि ससुर के जीवन या मृत्यु के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जा सकता।
भरण-पोषण की कानूनी जिम्मेदारी
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मृतक हिंदू की संपत्ति से सभी निर्भर व्यक्तियों का भरण-पोषण करना कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी है। इसमें विधवा बहू भी शामिल है।
संपत्ति का उपयोग और अधिकार
यदि विधवा बहू स्वयं या मृत पुत्र की छोड़ी गई संपत्ति से गुजारा नहीं कर सकती, तो पुत्र और अन्य वारिस संपत्ति से उसकी सहायता करने के लिए बाध्य हैं।
महिलाओं के अधिकारों में मजबूती
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विधवा बहू को भरण-पोषण से वंचित करना सामाजिक हाशिए पर डालना और महिलाओं की गरिमा को खतरा पहुंचाना होगा। यह फैसला हिंदू परिवारों में विधवा महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करने वाला माना जा रहा है। इस फैसले के बाद विधवा बहुओं को अब ससुर की संपत्ति से भरण-पोषण का स्पष्ट कानूनी संरक्षण मिल गया है।
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भारत के सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश कौन हैं?
वर्तमान में, न्यायमूर्ति सूर्यकांत (Justice Surya Kant) भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) हैं, जिन्होंने 24 नवंबर, 2025 को शपथ ली और न्यायमूर्ति भूषण आर. गवई (Bhushan R. Gavai) का स्थान लिया है; उनका कार्यकाल 9 फरवरी, 2027 तक होगा।
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