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Mathura : 30 फीट ऊंची लपटों से सुरक्षित निकले संजू पंडा

Author Icon By Surekha Bhosle
Updated: March 3, 2026 • 11:52 AM
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5200 साल पुरानी परंपरा का निर्वहन

धार्मिक नगरी मथुरा में होली के अवसर पर एक अनोखी परंपरा निभाई गई। मान्यता है कि यह परंपरा हजारों वर्षों से चली आ रही है, जिसमें श्रद्धा और विश्वास की अद्भुत झलक देखने को मिलती है।

मथुरा के फालैन गांव में संजू पंडा (Sanju Panda) ने 5200 साल पुरानी परंपरा को दोहराते हुए 30 फीट ऊंची आग की लपटों को पार किया. 45 दिनों के कठिन व्रत और ब्रह्मचर्य के बाद, प्रह्लाद के अवतार के रूप में उन्होंने धधकती होलिका के बीच से सुरक्षित निकलकर अटूट सनातन आस्था का परिचय दिया।

ब्रज की होली अपनी विविधता

ब्रज की होली अपनी विविधताओं के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है. लेकिन मथुरा के फालैन गांव में जो हुआ, उसने विज्ञान और समझ से परे आस्था की शक्ति का लोहा मनवा दिया. मंगलवार को होलिका दहन के दौरान संजू पंडा धधकती हुई 30 फीट ऊंची आग की लपटों के बीच से सुरक्षित बाहर निकल आए. इस दौरान हजारों की संख्या में मौजूद श्रद्धालुओं ने जय श्री कृष्णा के जयघोष से आसमान गुंजा दिया

मान्यता है कि फालैन वही स्थान है जहां भक्त प्रह्लाद (bhakt prahlaad) को जलाने के लिए होलिका उन्हें गोद में लेकर बैठी थी. ये 5200 साल पुरानी प्रह्लाद परंपरा है. इसी परंपरा को जीवंत करते हुए पंडा परिवार का कोई न कोई सदस्य हर साल जलती हुई होली की अग्नि को पार करता है. इस बार संजू पंडा ने इस कठिन चुनौती को स्वीकार किया. उनसे पहले उनके भाई और पिता भी कई बार इस परंपरा को निभा चुके हैं.

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45 दिनों का ब्रह्मचर्य और फलाहार

यह केवल एक क्षण का साहस नहीं, बल्कि 45 दिनों की कठोर तपस्या का परिणाम है. संजू पंडा ने बताया, ‘वसंत पंचमी से ही इस व्रत की शुरुआत हो जाती है. इस दौरान घर-परिवार से मोह खत्म कर दिया जाता है और अन्न का पूरी तरह त्याग कर केवल फलाहार लिया जाता है.’ होलिका दहन से पहले पंडा ने प्रह्लाद कुंड में स्नान कर भगवान का आशीर्वाद लिया।

30 फीट चौड़ी अग्नि और ईश्वरीय शक्ति

जब होलिका की आग की लपटें अपने चरम पर थीं, तब संजू पंडा दौड़ते हुए उस धधकती चिता के बीच से निकले. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग 20 फीट लंबी और 30 फीट चौड़ी थी, लेकिन संजू पंडा का बाल भी बांका नहीं हुआ. उन्होंने अनुभव साझा करते हुए कहा कि आग के बीच उन्हें ईश्वरीय मार्गदर्शन महसूस हुआ।

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