हैदराबाद। राष्ट्रीय ग्रामीण विकास और पंचायत राज संस्थान (NIRDPR) ने कनाडा उच्चायोग के ‘स्थानीय पहलों के लिए कनाडा कोष’ (CFLI) के सहयोग से ग्रामीण भारत में ट्रांसजेंडर और लैंगिक विविध समुदायों के लिए स्थायी वेतन आधारित आजीविका के अवसरों पर राष्ट्रीय स्तर की परामर्श कार्यशाला आयोजित की। कार्यशाला में नीति निर्माता, सरकारी अधिकारी, शिक्षाविद, लैंगिक अधिकार कार्यकर्ता, कौशल परिषदों के विशेषज्ञ, नियोक्ता और समुदाय के प्रतिनिधि शामिल हुए। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में वंचित ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए स्थायी और सम्मानजनक आजीविका के रास्ते तैयार करना था। कार्यशाला का उद्घाटन भारत सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की पूर्व सचिव सुमिता डावरा ने किया।
ट्रांस-आप्ति नामक वेब पोर्टल का लोकार्पण
उन्होंने इस अवसर पर ट्रांस-आप्ति नामक वेब पोर्टल का लोकार्पण किया। यह पोर्टल आजीविका अभिरुचि आकलन, सफल आजीविका पहलों का संग्रह और प्रेरक कहानियों का दस्तावेजीकरण प्रदान करता है। श्रीमती डावरा ने संस्थान से कहा कि इस पोर्टल को राष्ट्रीय रोजगार सेवा पोर्टल के साथ जोड़ा जाए और केंद्रीय योजनाओं के साथ समन्वय स्थापित किया जाए। कनाडा कोष ने कहा कि कनाडा ट्रांसजेंडर और लैंगिक विविध समुदायों के लिए सम्मानजनक और समावेशी आजीविका के अवसर बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है और इस दिशा में संस्थान के साथ सहयोग कर गर्व महसूस करता है। कार्यशाला में कानून, नीतियां, कार्यान्वयन के ढांचे, स्वयं सहायता समूह, औपचारिक रोजगार, उद्यम स्थापित करने की संभावनाएं, सहकारी समितियों की भूमिका, चुनौतियां और मददगार कारक जैसे विषयों पर विस्तार से विचार किया गया।
कार्यशाला में गृह प्रबंधन और देखभाल सेवा क्षेत्र के विशेषज्ञ
इस परामर्श से ग्रामीण और अर्द्ध-शहरी क्षेत्रों में ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए प्रगतिशील कानून और जमीनी रोजगार के बीच अंतर को कम करने में मदद मिलेगी। कार्यशाला में गृह प्रबंधन और देखभाल सेवा क्षेत्र के विशेषज्ञ, सहकारी प्रबंधन संस्थान, आतिथ्य क्षेत्र और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। समापन सत्र को भारतीय स्कूल ऑफ डेवलपमेंट मैनेजमेंट के संस्थापक रवि श्रीधरन ने संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर ज्योतिस सत्यपालन, डॉ. पार्थ प्रतिम साहू, डॉ. संध्या गोपाकुमारन और विशेषज्ञ अविनाबा दत्ता ने किया।
आजीविका से आप क्या समझते हैं?
यह व्यक्ति या परिवार द्वारा जीवनयापन के लिए अपनाए गए साधनों और कार्यों को दर्शाती है। इसके माध्यम से लोग अपनी आवश्यकताओं—भोजन, वस्त्र, आवास, शिक्षा और स्वास्थ्य—की पूर्ति करते हैं। खेती, व्यापार, नौकरी, स्वरोजगार या मजदूरी जैसे कार्य इसके प्रमुख साधन हो सकते हैं। यह केवल आय अर्जित करने तक सीमित नहीं, बल्कि सम्मानजनक और स्थिर जीवन जीने की व्यवस्था से भी जुड़ी होती है।
आजीविका क्या है?
जीवन चलाने के लिए नियमित रूप से कमाई का स्रोत ही इसका मूल स्वरूप है। यह किसी व्यक्ति के कौशल, शिक्षा और अवसरों पर निर्भर करती है। ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि और पशुपालन प्रमुख साधन हो सकते हैं, जबकि शहरी क्षेत्रों में नौकरी, उद्योग या सेवा क्षेत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। स्थायी और सुरक्षित आय का स्रोत व्यक्ति और समाज दोनों के विकास में सहायक होता है।
आजीविका का अर्थ क्या है?
शाब्दिक रूप से इसका अर्थ है—जीवन को धारण या संचालित करने का साधन। इसमें आय के साथ-साथ संसाधनों तक पहुंच, कौशल विकास और सामाजिक सुरक्षा भी शामिल होती है। जब किसी व्यक्ति को नियमित और पर्याप्त आय का साधन मिल जाता है, तो वह आत्मनिर्भर बनता है और अपने परिवार का भरण-पोषण बेहतर ढंग से कर पाता है।
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